सावित्री ने कैसे बचाए यमराज से अपने पति (सत्यवान ) के प्राण

सावित्री सत्यवान और यमराज की कहानी

Story Of Savitri Satywan and God Of Death (Yamraja)

हर साल  जयेष्ट मास की अमावस्या को सुहागिन औरतो द्वारा वट सावित्री व्रत  किया जाता है | यह व्रत उन्हें अखंड सौभाग्यवती बनाता है | यह शनि जयंती का भी दिन होता है |


स्त्री की पतिव्रता में इतनी शक्ति है की वो काल (यमराज ) के गले में जा चुके प्राणों को भी निकाल सकती है | यह कथा ऐसी ही  पतिव्रता धर्म से पूर्ण एक आदर्श पत्नी सावित्री की है जिसने अपने तप से अपने मरे हुए पति  सत्यवान को फिर से जीवित कर दिया था | उसकी शक्ति के आगे मृत्यु के देवता यमराज को भी हार माननी पड़ी थी |

वट सावित्री व्रत कथा

महाभारत के वनपर्व में एक पौराणिक कथा के अनुसार तत्त्‍‌वज्ञानी राजर्षि अश्वपति की एकमात्र कन्या थी सावित्री | उसने पति रूप में पूर्ण मन से सत्यवान को चुन लिया था | नारद ऋषि ने सावित्री को समझाया की उसका होने वाला पति अल्पायु है और एक साल बाद उसकी मृत्यु ही जाएगी | यह बात सुनकर सावित्री ने नारद से कहा की वो तन मन धन से सत्यवान को अपना पति स्वीकार कर चुकी है और अब किसी और व्यक्ति के बारे में सोच भी नही सकती |


सावित्री ने फिर सत्यवान से विवाह कर लिया और वे दोनों अपने अंधे माता पिता के साथ वन में रहने लगे | सावित्री सच्चे  मन से सत्यवान और उसके माता पिता की दिन रात सेवा करती थी |

सत्यवान की  मृत्यु का दिन

विधि ने पहले ही सत्यवान की मृत्यु का दिन चुन रखा था और सावित्री को पता चला गया की वो दिन आज ही है | सत्यवान लकड़ी काटने जंगल जाने लगा तो सावित्री भी उसके साथ जंगल चली गयी | कुछ समय बाद सत्यवान की आँखे बंद होने लगी और देखते देखते ही उसके प्राण उड़ गये और सत्यवान सावित्री की गोद में गिर गया |

सावित्री को दिखे यमराज

सावित्री को यमराज के दर्शन हुए जो उसके पति के प्राण लेने आये हुए थे | सावित्री ने यमराज से विनती करी की या तो उसके भी प्राण ले ले या फिर उसके पति को जीवन दे दे | यमराज ने उसे बहुत समझाया की उसकी मृत्यु का दिन अभी नही आया है | पर सावित्री यमराज के पैर नही छोड़ रही थी | अपने पति के प्रति ऐसी  पतिव्रता  को देखकर यमराज बहुत प्रसन्न हुए और सावित्री से पति के जीवन के अलावा अन्य वरदान मांगने की बात कही |

सावित्री ने यमराज को वचनों में फंसाया :

सावित्री ने कहा की आप यदि वरदान देना चाहते है तो मुझे सत्यवान की तरह १०० पुत्रो को जन्म देने का वरदान दे | यमराज ने उसे वचन दे दिया और जाने लगे | तब सावित्री ने यमराज से कहा की वो एक पतिव्रता नारी है | बिना अपने पति के कैसे १०० पुत्रो की माँ बनेगी | यमराज सावित्री की पतिव्रता और बुद्धिमता के आगे हार चुके थे और उन्हें अपने वचन को सत्य करने के लिए फिर से सत्यवान को नवीन आयु देनी पड़ी |

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