रुद्राक्ष की उत्पत्ति की कहानी

कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति

यह कोई सामान्य वृक्ष नही है | इसकी उत्पत्ति के पीछे एक पौराणिक कथा है जो पुराणों में आती है | इसके सम्बन्ध भगवान शिव से है | रुद्राक्ष शब्द रूद्र और अक्ष से मिलकर बना है | इसका अर्थ है रूद्र के आँसू | भगवान शिव का ही दूसरा नाम है रूद्र और उनके आँखों के आंसू से बना है रुद्राक्ष | रुद्राक्ष का शिव पूजा में महत्त्व अत्यधिक है |

पढ़े : कैसे करे असली रुद्राक्ष की पहचान 

रुद्राक्ष की उत्पत्ति की कथा

रुद्राक्ष के पेड़

रुद्राक्ष से जुडी कथा

एक बार कई हजारो सालो तक भगवान नीलकंठ घोर तपस्या में लीन थे | जब उनकी आँखे खुली तो उनका मन दुखी हुआ | उनकी आँखों से आँसू की बुँदे धरती पर गिर गयी | जहा जहा उनके आँसू गिर वहा वहा रुद्राक्ष के पेड़ उग गये | इस तरह जो हम रुद्राक्ष की माला देखते है वे उसी वृक्ष से उत्पन्न हुए है |

शिव और रुद्राक्ष का है गहरा रिश्ता

भगवान शिव के रूप को देखने पर आप ये पाएंगे की उनके शरीर पर दो चीजो के ही आभूषण होते है | भोलेनाथ के एक आभूषण है नाग और दूसरा है रुद्राक्ष की माला | शिव ने इसे अपने दोनों हाथो में , गले में और सिर पर बांध रखा है |

शिव मंत्रो के जप में सबसे मुख्य रुद्राक्ष

यदि आप भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय जानते है , तो उसमे एक है मंत्र जप सही विधि से | भोलेनाथ को खुश करते है एकाग्रचित होकर किये गये मंत्रो के जप | आप शिव के मंत्र का रुद्राक्ष की माला के साथ जप करे और आशुतोष भगवान आप पर कृपा करेंगे |

पढ़े : किस माला से किस देवता का मंत्र जप करना चाहिए

कितने प्रकार के रुद्राक्ष

रुद्राक्ष के प्रकार

रुद्राक्ष के मुख्य


रुद्राक्ष कितने तरह के है , इसके बारे में शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं | इन सभी में भेद इनके मुख के आधार पर किया जाता है | यह एकमुखी , दो मुखी से लेकर चौदह मुखी तक होते है |

इन सभी का फल और महत्व भी अलग अलग है | सबसे ज्यादा एक मुखी रुद्राक्ष की मान्यता होती है | असली एकमुखी रुद्राक्ष मिलना दुर्लभ है |

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