माँ कात्यायनी का जन्म ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों के तेज से

माँ कात्यायनी के जन्म की कथा

Story of Birth Of Goddess Katyayani वामन पुराण के अठारहवे अध्याय में माँ कात्यायनी के जन्म का विस्तार से वर्णन किया गया है |

एक समय दैत्य महिष ने  तीनो लोको पर विजय प्राप्त कर अधर्म और पाप में अत्यंत बढ़ोतरी करी | उसने स्वर्ग से भी देवताओ को निकाल कर भूलोक पर रहने पर विवश कर दिया था | सारे संसार में वो अधर्मी अपनी सभी सीमाओ को पार करके अपने आप को परम शक्तिशाली समझने लगा था |

कात्यायनी दुर्गा

सभी देवता अपने वाहनों पर आरूढ़ होकर  इस संकट के समाधान के लिए विष्णुलोक पहुंचे | यहा भगवान शिव और विष्णु जी विराजित थे | देवताओ की करुण पुकार पर भगवान शिव , विष्णु और ब्रह्मा जी के साथ इन्द्र और अन्य देवताओ के क्रोधित मुख से एक तेज प्रकट हुआ | वह तेज कात्यायन ऋषि के आश्रम के पास एकत्र हो गयी | कात्यायन ऋषि के मुख का तेज भी उस शक्तिपुंज में समा गया |

वह इतना तेज  था जैसे सहस्त्र सूर्य चमक रहे हो | इस तेज से विशुद्ध शरीर और विशाल नेत्रों वाली कात्यायनी का जन्म हुआ |

कात्यायनी के शरीर में सभी देवताओ का तेज :

महादेव के तेज से उनका मुख , अग्नि के तेज से उनके त्रिनेत्र , यमराज के तेज से केश , हरि के तेज से उनके 18 भुजाये , चंद्रमा के तेज से उनके स्तन , वरुण के तेज से जताए और नितम्ब , इंद्र के तेज से उनके मध्य का भाग , ब्रह्मा के तेज से उनके चरण कमल , आदित्यो के तेज से उनके पैरो की उंगलियाँ , वायु के तेज से उनके कान , यक्षो के तेज से नासिका बनी |

maa durga

किस देवता ने कौनसे अस्त्र शस्त्र दिए

श्री कृष्ण ने उन्हें अपना चक्र , शिव जी ने उन्हें अपना त्रिशूल , अग्नि ने शक्ति , वरुण ने शंख , सूर्य देव ने तरकश , इन्द्र ने घंटा सहित वज्र , ब्रह्मा ने कमंडलू के साथ रुद्राक्ष की माला , काल ने उन्हें खडग , यम ने उन्हें दण्ड , हिमालय ने सिंह और अन्य देवताओ ने कई शस्त्र भेंट किये |

इनका वाहन सिंह है। ऐसा विश्‍वास है कि मां कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है।

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