कूर्म जयंती पर जाने भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की कहानी

भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की कथा

Incarnation of Kurma Avatara Of Lord Vishnu – Story

वैशाख मास मास की पूर्णिमा पर कूर्म (कुर्मा ) जयंती का पर्व मनाया जाता है। कुर्म संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है कछुआ |   धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुए) का अवतार लिया था तथा समुद्र मंथन में सहायता की थी। यही कच्छप अवतार से नाम से भी प्रसिद्ध है । कूर्मावतार भगवान विष्णु के प्रसिद्ध अवतारों में से द्वितीय अवतार है | इसी दिन विष्णु भगवान का एक और अवतार गौतम बुद्ध के रूप में हुआ था |


विष्णु का अवतार कुर्म की कहानी

कूर्म अवतार की कहानी (Kurma Avatar Story) –

सनातन धर्म की पौराणिक कथा के अनुसार देवताओ और असुरो को अपनी शक्ति को बढ़ाना था | दोनों को अच्छी तरह पता था की क्षीरसागर में अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली चीजे है जो मथने से प्राप्त हो सकती है | पर ना तो अकेले देवता इतने काबिल थे और ना ही असुर की अकेले समुन्द्र को मथ ले | दोनों ने एक दुसरे का साथ देने और साथ में मिलकर मंथन करने का निर्णय लिया |

इतने बड़े समुन्द्र को मथने के लिए चीजे भी महाशक्तिशाली होना जरुरी थी | तब मथनी के लिए मंदराचल पर्वत को और नेती के लिए वासुकी नाग का प्रयोग किया गया | पर धुरी के लिए क्या काम में ले , यह सभी के लिए एक बड़ा प्रश्न था  ?


इतने बड़े मंदराचल पर्वत की धुरी बनने के लिए तब भगवान विष्णु ने एक बहुत बड़े और शक्तिशाली कछुए का अवतार लिया और अपनी के एक लाख योजन चौड़ी पीठ पर मन्दराचल को टिकाया और फिर दोनों तरफ से देवता और दानव समुन्द्र को मथने लगे |

इस तरह हमने देखा की विष्णू जी ने समुन्द्र मंथन के कार्य को पूर्ण करने के लिए कच्छप अवतार लिया |

कूर्म जयंती पूजा विधि

हम जानते है इस दिन विष्णु भगवान के दो अवतार कुर्म और बुद्ध जन्मे थे अत: मुख्यत यह दिन भगवान विष्णु की पूजा का है | इस दिन की पूजा से आपको सांसारिक सुखो के साथ विष्णु जी के परम धाम की प्राप्ति होती है |  इस दिन सुबह जल्दी उठ नित्य कर्मो को करके नहा ले | फिर विष्णु पूजा का संकल्प ले | यदि आपके पास घर के मंदिर में अष्ट धातु की कच्छप मूर्ति है तो यह सबसे अच्छा रहेगा | यदि अष्ट धातु की कच्छप मूर्ति नही है तो इसे आप आज के दिन खरीद ले | इस दिन इसे खरीदना अत्यंत शुभ रहेगा | ध्यान रखे इसे हमेशा जल से भरे  अष्ट धातु के पात्र में ही रखे |

asht dhatu kachua

यह भी पढ़े : घर में कछुआ रखने के लाभ

पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों में जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। भगवान विष्णु को भोग , माला , धुप अर्पित कर ॐ जय जगदीश हरे आरती उचारे |

भगवान विष्णु के मंत्र का जप करे और शास्त्रों से उनकी महान लीलाओ का रसस्वादन करे |

जरुरत मंदों को दान करे |

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