कैसे जन्मे पांडव जबकि पांडु का अंश नही था उनके शरीर में

पांडवो की जन्म कथा

महाभारत के अनुसार पाण्डु अम्बालिका और ऋषि व्यास के मानस  पुत्र थे। वे पाण्डवों के पिता और धृतराष्ट्र के कनिष्ट भ्राता थे। इनकी दो पत्नियाँ कुंती और माद्री थी |

पांडु को मिला भीषण श्राप

जब पांडु पिता नही बने थे तब वे एक बार शिकार पर गये | जंगलो के उस पार मृग के भ्रम में उन्होंने बाण चलाया जो एक ऋषि को लगा | ऋषि उस समय अपनी पत्नी के साथ सहवास कर रहे थे | इस अवस्था में मरते मरते उन्होंने पांडु को श्राप दे दिया की वे भी जब कभी सहवास करेंगे जो मर जायेंगे |

पांडव जन्म कथा महाभारत से

दुखी पांडु

श्राप के कारण दुखी पांडु ने अपनी कुंती को बताया की उनका जीवन बिना संतान के व्यर्थ है | व्यक्ति पर चार ऋण होते है जो उसे मनुष्य जीवन में उतारने ही चाहिए | पर बिना संतान के  पितृ-ऋण, ऋषि-ऋण, देव-ऋण तथा मनुष्य-ऋण से वो मुक्त नही हो पा रहे |

कुंती ने जन्म दिया 3 पांडव पुत्रो को

कुंती ने अपने पति को बताया की दुर्वासा ऋषि ने उन्हें प्रसन्न होकर ऐसा मंत्र दिया है जिससे वो किसी भी देवता का आह्वान कर पुत्र की प्राप्ति कर सकती है | पांडु की आज्ञा पाकर कुंती ने सबसे पहले धर्म देवता को बुलाया |

धर्म देवता से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई जो युधिष्ठिर  के नाम से जाने गये |

अगली बार उन्होंने वायु देवता को निमंत्रित कर भीम को जन्म दिया |

फिर अगली बार उन्होंने स्वर्ग के राजा इंद्र का आह्वान किया और उन्हें अर्जुन पुत्र रूप में प्राप्त हुए |

माद्री बनी नकुल तथा सहदेव की माँ :

पांडु ने कुंती से विनती करी की वो इस मंत्रो की दीक्षा माद्री को भी दे | कुंती ने अपने पतिदेव की आज्ञा का पालन करे ये संतान प्राप्ति मंत्र माद्री को भी सिखाये | माद्री ने मंत्र शक्ति से अश्वनी कुमारों को बुलाया और इस तरह नकुल तथा सहदेव का जन्म हुआ।

राजा पांडु की श्राप के कारण मृत्यु

पांडु को एक ऋषि ने मरते समय यह श्राप दे दिया था की जब भी पांडु किसी के साथ सहवास करेंगे तो उनकी उसी समय मृत्यु हो जाएगी | एक दिन ऐसे ही राजा पांडु माद्री के वन विहार पर थे | थोड़ी देर बाद माद्री एक झंरने के निचे स्नान करने लग गयी | पांडु की नजर अपनी पत्नी पर पड़ी और वे मदहोश होकर श्राप को भूल गये | उन्होंने अपनी पत्नी माद्री के साथ सहवास करना शुरू ही किया की श्राप के कारण उनके प्राण उड़ गये | उनकी मृत्यु का कारण माद्री ने स्वयम को माना और उनके देह के साथ ही सती हो गयी |

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