कैसे हुई लोहे की उत्पति – पौराणिक कथा अग्नि पुराण से

लोहे की उत्पति की पुराण में आई कहानी

Story About Iron Existence in Earth 

अग्नि पुराण में 245 वे अध्याय में आई पौराणिक कथा में बताया गया है कि किस तरह धरती पर लोहा उत्पन्न हुआ |

एक समय भगवान ब्रह्मा जी सुमेरु पर्वत पर यज्ञ कर रहे थे | उस यज्ञ की अग्नि से एक दैत्य उत्पन्न हुआ जिसका नाम लौहदैत्य था | उसे देखकर ब्रहमाजी चिंतित हो गये कि कही वो उनके यज्ञ में विध्न नही डाल दे | जब वे इस चिंता में थे तभी अग्नि से एक महाबल शाली सुन्दर शरीर वाले पुरुष भी प्रकट हुए | उसने अग्नि से निकलकर ब्रह्मा जी की वंदना की | आकाश से देवी देवताओ ने उस महाबली पर पुष्प बरसाए और उनका अभिनंदन किया |

लोहे की उत्पति की कहानी

इस अभिनंदन के कारण उस पुरुष का नाम नंदक पड़ा | और उसने फिर खडग का रूप धर लिया | देवताओ के अनुरोध पर श्री हरि नारायण ने उसे अपने आयुध के रूप में ग्रहण कर लिया | यह खडग नीले वर्ण का और उसकी मुष्टि रत्नमई थी | यह आकार में 100 हाथ के बराबर का था |

लौहदैत्य ने देवताओ पर अपनी गदा से आक्रमण करना जैसे ही शुरू किया | तभी भगवान् विष्णु ने अपने उस खड्ग से लौहदैत्य के शरीर को हजारो वारो से अंग भंग कर दिया | यह दैत्य छिन्न भिन्न होकर भूतल पर बिखर गया |

vishsnuश्री नारायण के हाथो संहार होने पर लौह दैत्य मरते मरते यह वरदान पा गया कि भूतल पर उसके शरीर के अंग से बने लौहे से भविष्य में हथियार बनाये जायेंगे |

इस तरह लौहा अयस्क के रूप में भूमि से निकाला जाने लगा |

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