द्रोपदी के पांच पति कैसे बने पांच पांडव

क्यों द्रोपदी के पांच पति हुए

हमारे समाज और धर्म में बहुपति प्रथा लोक और धर्म के विरुद्ध है | पर द्वापर में महाभारत में बताया गया है की द्रोपदी का विवाह पांच पांडवो से हुआ था | इस विवाह के पीछे माँ के वचन और शिव शंकर का आशीर्वाद था |


शिव का आशीर्वाद

शिव स्वरुप सहाय की पुस्तक ” प्राचीन भारत का सामाजिक और आर्थिक विकास में ” बताया गया है की एक बार  द्रोपदी ने पांच बार महादेव से विनती की थी की उनके अच्छा पति मिले | शिव जी तब प्रसन्न होकर द्रोपदी को ने उन्हें यह वरदान दिया की उनके पांच पति होंगे | इसी कारण द्रोपदी को  पांचो पांडवो की पत्नी बनना पड़ा |

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dropadi ke paanch pati

कुंती की आज्ञा के कारण बनी पांच पतियों की पत्नी

पांचाल के राजा द्रुपदकी पुत्री थी द्रोपदी | द्रोपदी के विवाह के लिए एक स्वयम्वर रखा गया पर इसमे द्रोपदी का विवाह उसी के साथ हो सकता था जो बहुत ही अच्छा धनुर्धर हो | इसके लिए एक प्रतियोगिता रखी गयी जिसमे विवाह की लालसा रखने वाले को घुमती हुई मछली की आँख में तीर मारना था | इस प्रतियोगिता में पांडवो में सबसे बड़े धनुर्धर अर्जुन जीत जाते है और द्रोपदी से विवाह कर अपने भाइयो के साथ अपनी माँ के पास लौट आते है |

माँ के पास आकर अर्जुन कुंती से कहते है की देखो , माँ मैं आपके लिए क्या लाया हूँ | माँ बिना बात जाने अर्जुन को आदेश दे देती है की , वत्स , जो भी लाये हो उसे आपस में बाँट लो | माँ के आदेश का पालन करने के लिए तब सभी पांडव भाइयो को द्रोपदी से विवाह करना पड़ता है |

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