अर्जुन को क्यों बनना पड़ा किन्नर ?

क्यों बने अर्जुन किन्नर

ये बात पांडवों के वनवास के समय की है। एक बार अर्जुन महाभारत के रचियता वेद व्यास जी  के पास गए और फिर से राज्य पाने के उपाय पूछने लगे | तब वेद व्यास जी ने उन्हें स्वर्ग में जाकर इंद्र से दिव्यअस्त्रों का ज्ञान लेने का मार्ग सुझाया |


अर्जुन किन्नर क्यों

तब गुरु के बताये गये मार्ग पर अर्जुन इंद्र लोक चले गए और इंद्र से आज्ञा लेकर वहां कई तरह की विद्याओं की शिक्षा लेने लगे। एक दिन जब चित्रसेन अर्जुन को संगीत और नृत्य की शिक्षा दे रहे थे, वहां पर इन्द्र की अप्सरा उर्वशी आई और अर्जुन पर मोहित हो गई।

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उर्वशी ने प्रकट की विहार की इच्छा

उर्वशी अप्सरा उर्वशी हर हाल में अर्जुन के साथ वासना सुख भोगना चाहती थी और उन्होंने सीधे अर्जुन से यह बात कह दी | अर्जुन ने   उर्वशी को इसके लिए असहमति जताई और कहा की आप पुरु वंश की जननी है और इस नाते आप मेरी माँ के तुल्य है | ऐसा विचार करना भी मेरे लिए पाप के समान है और आप भी यह बाते अपने दिमाग से निकाल दे |

रुष्ट उर्वशी ने दिया श्राप

इस तरह अपने प्रस्ताव को अर्जुन द्वारा ठुकराए जाने के कारण उर्वशी  अर्जुन पर नाराज हो गयी और श्राप दे दिया की तुम एक साल तक पुंसत्वहीन रहोगे | यह श्राप द्वापर में तब अर्जुन के लिए फायदेमंद रहा जब अज्ञातवास में अपनी पहचान छिपाने के लिए उन्हें  विराट नगर के राजा विराट की पुत्री को नृत्य सिखाया | वे अपने इस अज्ञात रूप में बृहन्नला नाम के किन्नर और नृत्य सम्राट बने | अज्ञातवास के बाद उत्तरा का विवाह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु से हुआ था।

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