क्यों अर्जुन ने भीष्म को बाणों की शैय्या पर लिटाया

अर्जुन ने भीष्म को बाणों की शैय्यापर क्यों लेटाया

Kyo Arjun Ne Bhism Ko Baano Ki Shaiyya Par Litaya महाभारत में आपने देखा या सुना होगा की गंगा पुत्र भीष्म पितामह कुरुक्षेत्र के मैदान में बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे | ना ही ही उनका शरीर धरती को छु पा रहा था और ना ही आकाश को | पर आपने कभी यह जाना की बाणों की शैय्या पर क्यों लेटना पड़ा था भीष्म को ….. आइये जानते है उस प्रसंग के बारे में जो अर्जुन और भीष्म के मध्य हुआ

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बाणों की शैय्या पर भीष्म

उस भीष्म पितामह चार पीढियों तक जीवित रहने वाले सबसे वृद्ध मनुष्य थे | अपनी भीष्म प्रतिज्ञा के कारण उन्होंने जीवन भर कोई विवाह नही किया था | इतने लम्बी उम्र पाने के कारण उन्हें धरती माता स्वीकार नही कर रही थी | अर्थात भूमि यह नही चाहती थी की भीष्म उनकी गोद में अपने प्राणों का त्याग करे |

इसी तरह आकाश भी उनकी मृत्यु को स्वीकार नही कर रहा था | भीष्म संतान रहित थे अत: उनके ऊपर पितृ ऋण था | अत: उन्होंने अर्जुन से कहा की , “हे वत्स | मुझे तुम इस रणभूमि में बाणों की शैय्या पर लेटा दो जिससे की मैं सूर्य के उत्रायण में आने से अपनी इच्छा शक्ति से मर जाऊ ” |

अपने पितामह के इस आदेश के कारण ही अर्जुन ने असंख्य बाणों की शैय्या पर भीष्म को लेटा दिया | वे उस अवस्था में ना धरती पर रहे और ना ही आकाश में |

इस दिन त्याग थे प्राण

माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी ( भीमाष्टमी  ) के दिन सूर्य देवता के उत्तरायण में आने के बाद भीष्म ने अपने प्राणों का त्याग किया | इसी कारण हिन्दू धर्म में  भीमाष्टमी भीष्म अष्टमी का महत्व है | इस दिन पितरो की शांति के लिए पूजा कर्म किये जाते है |

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