शनिदेव को लगता है इनसे भय

शनि को भय है इनसे




हम मनुष्यों में शनिदेव का भय है क्योकि यह मनुष्यों के अच्छे बुरे कर्मो का फल देते है | कलियुग में पाप चरम पर है अत: हमारे द्वारा पाप भी अधिक होते है और शनिदेव इसका भुगतान करने आ जाते है | पर ऐसे शनिदेव भी ऐसे दो व्यक्तियों से भय खाते है |

किस किस से डरते है शनिदेव :

धार्मिक शस्त्रों के अनुसार शनिदेव एक तो शिव के ग्यारवे अवतार हनुमानजी से डरते है और दुसरे ऋषि पिप्लाद से | हनुमानजी की तरह ही ऋषि पिप्लाद को भी भगवान शिव का अवतार माना  जाता है |

क्यों पिप्लाद से डरते है शनि :

ऋषि पिप्लाद के जन्म लेते ही शनिदेव की उनपर दशा पड़ गयी और इसी कारण उन्हें बचपन में ही अनाथ होना पड़ा | यह बात उन्हें जब पता चली तो उन्हें शनिदेव पर अत्यधिक क्रोध आया और उन्होंने प्रतिशोध लेने की भावना से ब्रह्मा जी की पूजा और तपस्या की |




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उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा | पिप्लाद ने शनि को सबक सिखाने के लिए ब्रह्मदंड मांग लिया और शनिदेव को खोजने लगे | एक पीपल के पेड़ पर उन्हें शनिदेव दिखाई दिए और उन्होंने हाव देखा ना ताव सीधे उन्हें पैर पर हमला कर दिया | इसकी कारण शनि अपंग हो गये | उन्होंने शनि को ही उनकी करनी का दंड दे दिया | इसी कारण शनि आज भी पिप्लाद से भय खाते है |

क्यों नाम पड़ा पिप्लाद : पिप्लाद का जन्म पीपल के वृक्ष के निचे हुआ था और उन्होंने इसी पीपल के पेड़ के निचे ब्रह्माजी की तपस्या की और इसी पीपल के पत्ते भी खाए अत: उनके   जीवन पर पीपल के वृक्ष का अधिक  प्रभाव रहा है |

क्यों करते है शनिवार के दिन पीपल की पूजा

शनिवार को पीपल की पूजा से मिलता है शनिदोष वालो को आराम : शनिवार शनि और हनुमान जो दोनों का वार है और पीपल का वृक्ष पिप्लाद की याद दिलाता है अत: इस दिन पीपल की पूजा करने से शनि का प्रकोप काम हो जाता है |




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