रावण की पुत्री सीता के पीछे का सच्च

रावण सीता की पुत्री

रामायण के ऊपर दुनियाभर के विद्वान अध्ययन कर रहे है | बहुत सारी रामायणे ( लगभग 100 से ऊपर ) भी लिखी गयी है जिसमे महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण मुख्य है | अदभुत  रामायण में रावण और सीता का संबंध पिता पुत्री का बताया गया है | हालाकि वाल्मीकि रामायण इस बात के ऊपर कोई सच्चाई नही डालता |

अदभुत रामायण 14वीं शताब्दी में लिखी गयी है और इसमे दो महा ऋषि भारद्वाज और वाल्मीकि के बीच संवाद है जो इस रामायण में बताया गया है |

अब जाने की किस तरह सीता को रावण की पुत्री बताया गया है

एक बार गृत्स्मद नामक ब्राह्मण अपनी पुत्री के रूप में लक्ष्मी को पाने के पूजा अर्चना करते रहते है | वे हर दिन पूजा अर्चना कर एक कलश में मंत्रोच्चारण के साथ दूध की कुछ बुँदे इसमे डालते रहते है | एक दिन वो ऋषि वहा नही होते और उनके पीछे से उस जगह रावण पहुँच जाता है और ऋषियों का वध करके उनका रक्त उस कलश में डालकर लंका ले आता है | मंदोदरी को यह कलश त्रिक्षण विष बताकर दे दिया जाता है |

कुछ दिनों के लिए फिर रावण विहार के लिए चले जाते है पर उनकी पत्नी मन्दोदरी उनकी किसी बात से बहूत दुखी होती है और अपनी आत्महत्या के लिए उसी कलश से जहर का सेवन कर लेती है | पर यह वरदानी कलश होने से वो मरने की बजाय गर्भवती हो जाती है | रावण की अनुपस्थी में इस तरह गर्भवती होना रावण के क्रोध को जगाने जैसा था |

यह सोचकर वे भी तीर्थ यात्रा के बहाने कुरुक्षेत्र आ जाती है और अपने गर्भ को निकालकर भूमि में दफना देती है | इसके बाद पुनः लंका आ जाती है | समय के साथ यह भ्रूण परिपक्व हो जाता है |

एक दिन मिथिला के राजा जनक जब इस जमीन पर हल चला रहे होते है तब धरा को जोतने से उन्हें यह पुत्री प्राप्त होती है जो जनक नंदिनी कहलाती है | पर इस कथा के अनुसार तो सीता की माँ रावण की पत्नी मंदोदरी ही हुई |

हलाकि मुख्य प्रमाणिक ग्रन्थ इस बात को सही नही मानते |

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