भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु

मित्रों हम अक्सर सुनते हैं जो इस धरती पर आया है उसे एक दिन जाना होता है जन्म और मरण यंत्र करने वाले एक प्रक्रिया है ऐसा ही कुछ हुआ था द्वारिकाधीश श्री कृष्ण भगवान के साथ उनकी भी मृत्यु हुई थी भले ही वह स्वेच्छा से हुई हो !

इस नियम में बस आठ चिरंजीवी ही ऐसे है जो अभी भी जीवित है | 

उनकी मृत्यु के कुछ अहम पहलू यहां बताए जा रहे है ! भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। उनका बचपन गोकुल, वृंदावन, नंदगाव, बरसाना आदि जगहों पर बीता। अपने मामा कंस का वध करने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता को कंस के कारागार से मुक्त कराया और फिर जनता के अनुरोध पर मथुरा का राजभार संभाला। कंस के मारे जाने के बाद कंस का ससुर जरासंध कृष्ण का कट्टर शत्रु बन गया। जरासंध के कारण कालयवन मारा गया। उसके बाद कृष्ण ने द्वारिका में अपना निवास स्थान बनाया और वहीं रहकर उन्होंने महाभारत युद्ध में भाग लिया।

गांधारी ने दिया कृष्ण को वंश सहित मरने का श्राप

महाभारत युद्ध के बाद कृष्ण ने 36 वर्ष तक द्वारिका में राज्य किया। दुष्परिणाम स्वरूप उस युद्ध में गांधारी के सौ पुत्र मारे गए थे ! युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण गांधारी के पास गए थे उनसे मिलने के वास्ते गांधारी पहले से अपने सौ पुत्रो की मृत्यु से बहुत व्याकुल थी उसी समय जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को आते हुए देखा तो गांधारी और क्रोधित हो गई और उन्होंने क्रोध में आकर भगवान श्रीकृष्ण को श्राप दिया की जिस तरह मेरे सो पुत्रों का नाश हुआ है उसी तरह आपके वंश का विनाश भी आपस में लड़ते हुए होगा ! माना जाता है कि इस श्राप को पूर्ण करने के लिए अपने कुल के सभी लोगों की मति भ्रमित कर दी थी ! गांधारी के इस हिसाब से सभी यदुवंशी भयभीत हो गए थे ! इसी डर के चलते श्री कृष्ण की आज्ञा से सभी यदुवंशी प्रभास आ गए वहां उन्होंने खुशी में बहुत नशीली दवा पी ली और मतवाले होकर एक दूसरे को मारने लगे उस लड़ाई में कुछ ही यदुवंशी जीवित बचे थे !

भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु

Photo Courtesy :www.mostinside.com



और एक बात कही जाती है कि साम्ब के पेड़ से निकली हुई मुसल को जब भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा अनुसार मसला गया और उससे बने चूर्ण को वही फेका गया था ! ऋषियो के श्राप से उस चूर्ण द्वारा उत्पन्न हुई झाड़ियों से उन्होंने एक दूसरे को मारना शुरू किया जिससे बचे हुए प्रमुख यदुवंशियों का विनाश हो गया था ! कुछ दिनों बाद महाभारत युद्ध की चर्चा करते हुए साथियों की ओर कृतवर्मा में विवाद हो गया साथ यह कि मैं गुस्से में आकर कृतवर्मा का सिर काट दिया ! इससे यदुवंशियों में युद्ध भड़क गया जिसे वे टुकड़ों में विभाजित हो कर एक दूसरे का संहार करने लगे इस विवाद से श्रीकृष्ण के पुत्र प्रदुमन और मित्र सात्यकि के सहित सभी यदुवंशी मारे गए थे ! यदुवंशियों के नाश के बाद कृष्ण के बड़े भाई बलराम भी समुद्र तट पर जाकर बैठ गए और एकाग्रचित होकर परमात्मा में लीन हो गए ! अधिकतर यदुवंशी मारे गए थे ! बचे हुए को द्वारिका छोड़ने के आदेश दे दिए गए थे ! सबने हस्तिनापुर में शरण ली ! यादवों का अंत होते ही कृष्ण की द्वारिका सागर में विलीन हो गई थी ! एक दिन भगवान श्री कृष्ण पीपल के पेड़ के नीचे योगनिंद्रा में लेटे हुए थे ! उसी समय “जरा” नामक एक बहेलिये ने श्री कृष्ण भगवान को हिरण समझकर उन पर विषयुक्त बाण चला दिया जो उनके पैर के तलवे में जाकर लगा ! ( हमारे संतो का मानना है कि बहेलिया कोई और नहीं बल्कि वानरराज महाराज वाली थी कहते हैं कि प्रभु ने त्रेता युग में राम के अवतार में बाली को छुप कर मारा था कृष्ण अवतार के समय भगवान ने उसी वाली को पहेलियां बनाया और अपने लिए वैसे ही मृत्यु चुनी जैसी वाली को दी थी) श्री कृष्ण भगवान ने इस को बहाना बनाकर अपनी देहत्याग दी ! महाभारत युद्ध के 36 वर्ष बाद इस क्षेत्र में श्री कृष्ण भगवान ने अपनी देहत्याग दी थी ! इसके बाद श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ द्वारिका के अंतिम यादवों के शासक थे ! वज्रनाभ के नाम से ही मथुरा क्षेत्र को ब्रजमंडल कहा जाता है ! इस प्रकार माना जा सकता है कि भगवान श्री कृष्ण की भी मृत्यु हुई है !

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