पार्वती ने दिया शनि को अपंग होने का श्राप

एकबार शनिदेव कैलाश पर्वत पर आये तब माँ पार्वती से मिलने पर उनकी नजर निचे झुकी हुई थी | पार्वती जी ने उनसे पूंछा  की वो नजरे निचे क्यों झुकाए हुए है | तब शनिदेव ने बताया की उनकी नजर से उनके पुत्र श्री गणेश को नुकसान पहुँच सकता है इसी भय से उनकी नजरे निचे है | यह सुनकर शिव पत्नी गिरिजा जोर जोर से हँसने लगी | वे शनिदेव का उपहास उड़ाने लगी की भला उनके पुत्र का किसी की नजर कैसे नुकसान पहुंचा सकती है और गणेश को आवाज देकर शनि के करीब बुला लिया |

शनि अपंग

जब भगवान शनि की द्रष्टि से बालक गणेश का सिर अलग हो गया तब कुपित होकर माँ पार्वती ने शनिदेव को श्राप दे दिया की वो भी अंगविहीन हो जायेगा | शनि देव ने स्वयं को दोष रहित बताया और याद दिलाया की उन्होंने नजर डालने से  पहले ही चेतावनी दी थी | माँ पार्वती को गुस्सा शांत हो चूका था | उन्होंने कहा की वो अपना श्राप वापिस तो नही ले सकती पर इसके साथ साथ वरदान दे सकती है | श्राप की वजह से शनि आज से लंगड़े चलने लगेंगे | और वरदान यह है की आज से तुम सभी ग्रहों के राजा होंगे | भगवान विष्णु के परम भक्त कहलाओगे | योगियों में परम योगी और चिरजीवी बनोगे |

इस तरह नाराज होकर जगदम्बा ने श्राप भी दिया तो प्रसन्न होकर वरदान भी |
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