कैसे अवतरित हुए शनिदेव शिला रूप में शनि शिंगणापुर में

भगवान शनि का अवतरण

शनि के प्रभावी मंदिरों में शनि शिंगणापुर अग्रणीय रूप से अपनी पहचान बना चूका है | शनि का सबसे चमत्कारी शनिधाम के रूप में प्रसिद्ध है | इस जगह शनिदेव मूर्ति रूप में नही बल्कि लगभग ६ फीट की काले पत्थर की शिला के रूप में भक्तो को दर्शन देते है और उनकी मनोकामना पूर्ण करते है |

कैसे शनिदेव शिला रूप धारण करके यहा पूजे गये :

प्राचीन समय में शिंगणापुर गांव में एक प्रलयकारी बाढ़ आई थी | बाढ़ के बहते पानी में एक काली शिला भी आ गयी जो एक बेर के पेड के पास अटक गयी | बाढ़ का पानी धीरे धीरे कम हुआ तो इतनी बड़ी दिव्य काली शिला देखकर वे सभी चकित हो गये | उन सभी में से एक ने निरिक्षण के लिए काली शिला पर लकड़ी से स्पर्श मात्र ही किया की शिला से खून बहने लगा और घाव सा प्रतीत होने लगा | यह बात पुरे गाँव में फ़ैल गयी | सभी उस दिव्या शिला को देखने आने लगे पर शिला से खून का बहना किसी को समझ नही आया | रात्रि में सब सारा गाँव सो रहा था था तब उस गाँव की किसी व्यक्ति को सपने में शनिदेव ने दर्शन दिए और शिला में खुद का रूप बताकर उसे आज्ञा दी की की वो प्रतिष्ठापना करवाए |

दुसरे दिन उस व्यक्ति ने यह स्वप्न वाली बात पुरे गाँव में बता दी | एक बैलगाड़ी उस बेर के पास लाइ गयी और उस शिला को उठाने की पूरी कोशिस की गयी पर वो तस से मस तक नही हुई | यह प्रयास ३ दिन चला पर शनिदेव रूपी शिला हिली तक नही |

फिर कुछ दिन उसी व्यक्ति को सपने में शनिदेव ने फिर से दर्शन दिए और बोले की वो शिला तब ही उठेगी जब उसे श्याम वर्ण के सगे मामा भांजा उठाएंगे |

स्वप्न में मिले आदेश के अनुसार फिर से प्रयास किया गया और अब तो मामा भांजा द्वारा आसानी से शिला उठ गयी और बैलगाड़ी में रख दी गयी | उस गाँव के घर घर में शनि देवी की महा महिमा के चर्चे हो रहे थे | शिंगणापुर  गाँव अपने आपको धन्य मान रहा है शनि के इस गाँव में अवतरित होने से |

शनि ने दिया पुत्र होने का आशीष भक्त ने बनाया चबूतरा :

सोर्ण के भक्त जवाहरलाल ने यहाँ भगवान शनि से पुत्र रत्न की कामना की और भेट रूप में चबूतरा बनाने की बात की | कुछ दिनों में उन्हें पिता बनने के संकेत मिल गये और उन्होंने शिला के चारो तरफ चबूतरा बना दिया | आगे भी बहुत से भक्तो ने शिला के चारो तरफ कुछ बनवाना चाहा पर शनि ने उनके कार्य पूर्ण नही होने दिए | शनिदेव को बस यही खुला स्थान ही पसंद आता है |

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