नक्षत्र कितने होते है और उनका महत्व और प्रभाव क्या है

आज हम आपके लिए यह ज्योतिष शास्त्र से जुडी पोस्ट लाये है जिसमे हम बताएँगे की नक्षत्र क्या होते है और इनकी संख्या कितनी है |

कैसे बने नक्षत्र – जाने कहानी

शिव महापुराण में बताई गयी एक पौराणिक कथा के अनुसार दक्ष ने अपनी 27 कन्याओ का विवाह भगवान चन्द्र देवता से कर दिया |


चन्द्र देव इस विवाह को लेकर अत्यंत प्रसन्न हुए | कुछ समय बीतने के बाद चंद्रमा के सबसे करीब और सबसे अजीज रोहिणी हो गयी | चन्द्र देवता अपना पूरा ध्यान उसी पर रखते और बाकि पत्नियों को अनदेखा कर देते | इसी कारण रोहिणी तो प्रसन्न रहती पर बाकि 26 कन्याये दुखी रहने लगी |कैसे बने नक्षत्र

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अपनी व्यथा सभी दुखी पुत्रियों ने अपने पिता दक्ष से बताई | दक्ष ने पहले तो चन्द्र देवता को समझाया पर चन्द्र देव तो सिर्फ रोहिणी पर ही आसक्त थे | दक्ष ने तब क्रोध में आकर चंद्रमा को श्राप दे दिया की तुम्हे क्षय रोग हो जाये |


राजा दक्ष के श्राप के प्रभाव से चन्द्रमा की रोशनी जाती रही | वे दुखी होकर ब्रह्मा जी के पास गये | ब्रह्मा जी ने उन्हें शिव जी की तपस्या करने का उपाय बताया |

चंद्रमा ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर घोर तपस्या की | शिव ने उन्हें दर्शन दिए और बताया की आज से हर मास में दो पक्ष होंगे एक कृष्ण और एक शुक्ल

कृष्ण पक्ष के 15 दिनों में तुम्हारी रोशनी क्षीण होती जाएगी पर शुक्ल पक्ष में तुम्हारी रोशनी बढ़ती जाएगी और पूर्णिमा की रात तुम अपने सम्पूर्ण रूप में होंगे तो रोहिणी नक्षत्र में वास करोगे |

मास में 27 दिनों तक तक बारी बारी सभी 27 नक्षत्रो में वास करोगे | ये नक्षत्र ही अब से तुम्हारी पत्नियों का रूप होगा | बारी बारी से इसमे गमन करने से ये सभी प्रसन्न होगी |

27 नक्षत्रो के नाम

1 कृत्तिका,2 रोहिणी ,3 मृगशीर्षा ,4 आर्द्रा,5 पुनर्वसू,6 पुष्य,7 आश्लेषा ,8 मघा ,9 पूर्वाफाल्गुनी ,10 उत्तराफाल्गुनी ,11 हस्त ,12 चित्रा ,13 स्वाति ,14 विशाखा ,15 अनुराधा ,16 ज्येष्ठा,17 मूल,18 पूर्वाषाढ़ा ,19 उत्तराषाढ़ा ,20 अभिजित ,21 श्रवण ,22 घनिष्ठा ,23 शतभिषक ,24 पूर्वाभाद्रपदा ,25 उत्तराभाद्रपदा ,26 रेवती,27 अश्विनी ,28 भरिणी।

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