भद्रा क्या होती है और क्यों इसे अशुभ माना जाता है

सनातन धर्म में सकारात्मकता और नकारात्मकता के आधार शुभ अशुभ समय का वर्गीकरण किया गया है | जैसे पूर्णिमा के दिन को सबसे अच्छी तिथि मानी गयी है उसी के विपरीत अमावस्या को उसके विपरीत माना जाता है | कुछ दिन जिन्हें हम अबूझ मुहूर्त के नाम से जानते है बहुत ही पावन होते है | जबकि पंचक और भद्रा को बुरा समय माना जाता है | आइये आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे कि भद्रा क्या होती है और क्यों इसे शुभ नही माना जाता |

पढ़े – पंचक क्या होते है और इसमे कौनसे काम नही करने चाहिए

क्यों होती है भद्रा अशुभ

भद्रा काल किसी दिन का एक विशेष समय अवधि होती है जिसमें ना तो कोई शुभ कार्य को शुरू किया जाता है और ना ही समाप्त | अत: जानकर व्यक्ति इस भद्रा काल का पहले ही ध्यान रखकर अपना कार्य सम्पन्न करते है |

भद्रा कौन है ?

शास्त्रों के अनुसार सूर्य देवता की पुत्री का नाम है भद्रा जो अपने भाई शनि देव की तरह रूद्र स्वभाव की होती है | इसी कारण ब्रहम देव ने उन्हें काल गणना और पंचांग में एक समय अवधि दी है जिससे की व्यक्ति उस समय अवधि का ध्यान रखकर उनके स्वभाव के बुरे परिणाम से बच सके | जब भद्रा लगती है तो शुभ कार्य नही किये जाते है | आपने यह होली , राखी के दिनों में  अपने परिवार में देखा होगा कि भद्रा काल में होलिका दहन और राखी नही बाँधी जाती है | अत: अब आप समझ गये होंगे कि पंचांग के विष्टि करण को ही ‘भद्रा’ कहा जाता है |

तीनो लोको में विचरण करती है भद्रा

भद्रा का स्वभाव चंचल है अत: वह एक स्थान पर ज्यादा देर नही टिकती | यह तीनो लोक में घुमती है | यदि चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होता है तब भद्रा का वास पृथ्वी पर होता है

यदि चंद्रमा कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में स्थित होने पर भद्रा पाताल लोक में होती है |

और जब  चंद्रमा जब मेष, वृष, मिथुन या वृश्चिक में रहता है तब भद्रा का वास स्वर्गलोक में रहता है |

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कब कब रहती है भद्रा

पंचांग अनुसार एक माह में ४ बार भद्रा आती है | जैसे शुक्ल पक्ष की अष्टमी व पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्द्ध में भद्रा होती है जबकि चतुर्थी व एकादशी तिथि के उत्तरार्ध में भद्रा होती है.

कृष्ण पक्ष की बात करे तो  तृतीया व दशमी तिथि का उत्तरार्ध और सप्तमी व चतुर्दशी तिथि के पूर्वार्ध में भद्रा लगी रहती है |

हमेशा भद्रा नही होती है अशुभ

यदि भद्रा स्वर्ग या पाताल लोक में विद्यमान है तब पृथ्वी पर रहने वाली व्यक्तियों के लिए भद्रा अपना कोई गलत प्रभाव नही दिखाती है अत: उस समय हम भद्रा को अशुभ नही बोल सकते है |

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