काशी विश्वनाथ मंदिर

Kashi Vishwanath Temple Jyotirling

काशी विश्वनाथ मंदिर जिसे विश्वेश्वर महादेव मंदिर भी कहा जाता है , बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर प्राचीनकाल से बनारस (वाराणसी) में स्तिथ है। काशी को मोक्षधाम भी खाते है , जीवन की मुक्ति इसी मुक्तिदायिनी नगरी से होती है | कहते है की यह नगरी शिवजी के त्रिशूल पर विराजमान है | यह धाम हिन्दू धर्म में विशिष्‍ट स्‍थान रखता है | गंगा स्नान के बाद विश्वनाथ पर गंगा जल से स्नान करना मोक्ष पाने के समान है | जब भी सृष्टि का प्रलय होता है तब सिर्फ यह ही नगरी ऐसी है जो अजर अमर रहती है | शिव स्वयं इसे अपने त्रिशूल पर विराजमान कर लेते है | फिर नयी सृष्टि बसने पर इसे फिर से विराजती कर देते है |

भगवान् विष्णु और ब्रह्मा का इस नगरी से जुडाव :

कहते है सृष्टि स्थली के लिए भगवान् विष्णु से यही से घोर तपस्या की थी | इसी स्थान पर उनके सोने पर नाभि-कमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए जिन्होंने शिव आदेश पर सृष्टि की रचना की |

महारानी अहिल्या बाई ने वर्तमान मंदिर 1780 में निर्माण करवाया था। फिर महाराजा रंजीत सिंह द्वारा 1853 में १ टन शुद्ध सोने द्वारा इस मंदिर को मढ़्वाया गया ।

इस मंदिर में बहूत सारे महासंतो का आगमन हुआ जिसमे तुलसीदास जी , आदि शंकराचार्य,, रामकृष्ण परमहंस, दयानंद सरस्वती आदि थे |

काशी की महिमा

सभी तीर्थो का सार है काशी , मोक्ष दायिनी यह भूमि गंगा के होने से बहूत ही पावन है | यहाँ रहकर प्राण त्यागने वाले को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है |

मतस्यपुराण का मत है की काशी जीवन मृत्यु के चक्कर को खत्म करने वाली युक्ति है जहा पांच मुख्य तीर्थ स्थल है |

जो निम्न प्रकार है

  1. दशाश्वेमघ,
  2. लोलार्ककुण्ड,
  3. बिन्दुमाधव,
  4. केशव और
  5. मणिकर्णिका

यह सभी सम्मिलित होकर अविमुक्त क्षेत्र कहलाते है |

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