वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक महा सिद्ध ज्‍योतिर्लिंग है जो अति रामायण के समय से है | यह ज्योतिर्लिंग भारतवर्ष के झारखंड में देवघर नामक स्‍थान पर स्थित है। देवघर का अर्थ होता है देवताओ का घर | इस शिव धाम वैद्यनाथ धाम और देवघर धाम के नाम से भी जाना जाता है | यह एक सिद्ध पीठ है जहा शिव भक्तो की हर मनोकामना शिव भक्ति और आशीष से पूर्ण होती है | यहा के दिव्य शिवलिंग को कामना पूर्ति लिंग भी कहा जाता है जो मनुष्यों की हर कामना को पूर्ण करता है |

ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे की कथा :

रामायण के सतयुग समय में राक्षकराज रावण ने शिवजी की घोर तपस्या की | इसी तपस्या में उन्होंने बार बार अपने शीश को काट कर शिवलिंग पर अर्पण किया पर हर बार शिव कृपा से पुनः शीश रावण के लग जाता | जब यह क्रम दसवी बार दोहराया गया तब भोलेनाथ ने साक्षात् रावण को दर्शन दिए और उसके इस बलिदान से बड़े प्रसन्न हुए | शिवजी ने खुश होकर उसे वरदान मांगने के लिए कहा | रावण ने शिवलिंग के रूप में शिवजी को लंका में ले जाने की बात कही | भोले बाबा तो यह ही भोले , इसलिए झट से रावण की बात मान गये पर यह बात भी कह दी यदि तुमने इस शिवलिंग को धरती पर कही भी उतारा तो यह वही पर स्थापित हो जायेगा | साथ ही साथ उसे दशानन (दस सिरों वाला ) होने का भी वरदान दे दिए |

सभी देवी देवता इस वरदान से बड़े चिंतित थे , वे अच्छी तरह जानते थे की यदि शिवजी के रूप में शिवलिंग लंका में स्थापित हो जायेगा तो रावण और लंका दोनों अजेय हो जाएगी | तब सभी ने यह ठान लिया की कुछ भी हो यह शिवलिंग लंका तक नही जाना चाहिए | बुद्दी के सबसे बड़े देवता श्री गणेश को यह काम सोपा गया |

रावण शिवलिंग लेकर जब लंका की तरह जा रहा था तब श्री गणेश जी कि माया से उसे लघुशंका निवृत्ति की आवश्यकता हुई। रावण में राह में खड़े एक बालक क हाथ में यह शिवलिंग थमा लघुशंका के लिए चला गया और जाते जाते उसे आदेश दिया की इसे वो धरा पर न रखे जब तक वो आ नही जाता । उस बालक के रूप कोई और नही स्वं गणेश जी थे | रावण के जाने पर गणेशजी से उस शिवलिंग को वही रख दिया और चले गये | लौटने पर रावण ने शिवलिंग को जमीन पर रखा पाया और वह सारा माजरा समझ गया | पूरी ताकत लगाने के बाद भी वो उसे हिला ना पाया | जाते जाते क्रोध में अपनी ऊँगली से शिवलिंग को और दबा गया |

इधर विष्णु और स्वर्ग के देवताओं ने आकर उस शिवलिंग की पूजा की। शिवजी का दर्शन होते ही सभी देवी देवताओं ने शिवलिंग की वहीं उसी स्थान पर प्रतिस्थापना कर दी और शिव-स्तुति करने लगे | इस शिवलिंग से स्वम् शिवजी ने दर्शन दिए अत: समय के साथ जनश्रुति व लोक-मान्यता के अनुसार यह वैद्यनाथ-ज्योतिर्लिग शिव भक्तो की मनोकामनाओ को पूर्ण करने लगा और एक चमत्कारी धाम के रूप में प्रसिद्द हुआ |

देवघर का शाब्दिक अर्थ है देवी-देवताओं का निवास स्थान। देवघर में बाबा भोलेनाथ का अत्यन्त पवित्र और भव्य मन्दिर स्थित है। हर साल सावन के महीने में स्रावण मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु “बोल-बम!” “बोल-बम!” का जयकारा लगाते हुए बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते है। ये सभी श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगा का जल लेकर कई सौ किलोमीटर की अत्यन्त कठिन पैदल यात्रा कर बाबा को जल चढाते हैं।

मन्दिर के समीप ही एक विशाल तालाब भी स्थित है। बाबा बैद्यनाथ का मुख्य मन्दिर सबसे पुराना है जिसके आसपास अनेक अन्य मन्दिर भी बने हुए हैं। बाबा भोलेनाथ का मन्दिर माँ पार्वती जी के मन्दिर से जुड़ा हुआ है।

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