अमरनाथ शिवलिंग की शिव पार्वती कथा

amarnath- yotirling shivji

अमरनाथ अर्थात अमरता की कथा सुनाने वाले अमर शिव शंकर जो सभी के नाथो के नाथ है |
amarnath shivling story

अमरनाथ शिवलिंग की कहानी पुराणों से

पुराणों में एक प्रसंग आता है कि एक बार माँ पार्वती ने हठ पकड़ ली की आप तो अमर है और मुझे हर बार नए नए अवतार लेकर और फिर तपस्या करके आपको क्यों पाना होता है ? यह क्यों होता है ! इसके पीछे के कारण मुझे समझाए ? आपके रूप आपके अमरता का मुझे कारण बताये | शिवजी माँ पार्वती के हठ के आगे हार गये और एक गुप्त जगह पर उनके सभी प्रश्नों के जवाब देने के लिए राजी हो गये | यह रहस्य इतने शक्तिशाली और अमरता का पान थे की जो कोई भी इन्हे सुन लेता वो अमर हो जाता |
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इस कारण शिव जी मां पार्वती को लेकर किसी गुप्त स्थान की ओर चल पड़े। सबसे पहले भगवान भोले ने अपनी सवारी नंदी को पहलगाम पर छोड़ दिया, इसलिए बाबा अमरनाथ की यात्रा पहलगाम से शुरू करने का बोध होता है। आगे चलने पर चंद्रमा को चंदनबाड़ी में अलग कर दिया और गंगा जी को पंचतरणी में। उसके बाद गले पर वासी सर्प को शेषनाग पर छोड़ दिया। इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा। आगे अपने पुत्र गणेश को गणेश टॉप पर छोड़ दिए | पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े को भी त्याग दिया। इस प्रकार महादेव ने अपने पीछे जीवनदायिनी पांचों तत्वों को भी अपने से अलग कर दिया। और अब शिवजी के साथ सिर्फ माँ पार्वती ही उस गुफा में पहुँच पाए |

एक जगह बैठकर शिवजी ने कथा सुनाना शुरू कर दिया | कथा सुनते सुनते कब माँ पार्वती सो गयी पर उस गुफा में कोई इस कथा पर हामी भर रहा था | जब शिवजी ने कथा पूरी सुना दी तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ की पार्वती तो सो रही है तो कथा में हुंकार कौन भर रहा था | तब शिवजी ने ऊपर एक पत्थर पर एक जोड़ा कबूतर कबूतरी का देखा | शिवजी इस रहस्य को इस तरह किसी अनचाये के सुनने पर बड़े क्रोधित हुए और अपने क्रोध से उन दोनों को भस्म करने ही वाले थे की कबूतरों ने अमर कथा का वास्ता देते हुए खुद के प्राणों की विनती की |

शिवजी शांत हुए और उन्हें वरदान दे दिए की तुमने अमरता की कहानी पूरी सुनी है और तुम एक कथा के साक्षी हो अत तुम आज से अमर हो और भक्तो को दर्शन युगों युगों तक देते रहोगे |

 

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