बद्रीनाथ धाम

विष्णु भगवान का बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ धाम हिन्दू धर्म में सबसे बड़े धाम से अपनी पहचान बना चूका है | यह धाम भगवान विष्णु जो की बद्री के रूप में जाने जाते है को समर्प्रित है | इस धाम की यात्रा करने वालो को साथ में पास में केदारनाथ , गंगोत्री ,यमुनोत्री ऋषिकेश और हरिद्वार के दर्शन करने का भी  मौका  मिलता है | यह धाम ऐसा है जो उत्तराखण्ड के चार धाम और भारत के मुख्य चार धाम

बद्रीनाथ की भौगोलिकता :

उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे  बद्रीनाथ नर नारायण पर्वत की गोद में बासा हुआ और   नीलकंठ  पर्वत के पीछे बना हुआ है | इस स्थल की स्थापना गुरु शंकराचार्य ने की | गुरु शंकराचार्य ने भारत के चारो दिशाओ में चार धामों को बताया | यह धाम उत्तर दिशा में  स्तिथ है |

मुख्य शहरो से बद्रीनाथ की दुरी :

ऋषिकेश      297 किमी.
देहरादून      314 किमी.
कोटद्वार      327 किमी.
दिल्ली       395 किमी.

बद्रीनाथ मंदिर के अन्दर : यह मंदिर तीन भागो से बना हुआ है | मुख्य गर्भगृह, दर्शनमण्डप और सभामण्डप | गर्भगृह में भगवान बद्री (विष्णु ) की ध्यान अवस्था में काले पत्थर से बनी शालग्रामशिला  प्रतिमा है | इसके चार भुजाये  इस प्रतिमा के दाए भाग पर लक्ष्मी और कुबेर की प्रतिमा विराजमान है | नर नारायण की मुर्तिया भी समीप लगाई गयी है | पुरे मंदिर परिसर में 15 मूर्तियाँ लगी हुई है | मंदिर में नर नारायण की पूजा और अखंड ज्योत जलती है |

6 महीने देते है दर्शन :

उत्तर के इन चार धाम की यात्रा गर्मियों में शुरू होती है और फिर सर्दियों में बंद हो जाती है | अप्रैल मई में आने वाले अक्षय तृतीया को मंदिर के पट धूम धाम से खोले जाते है और दिवाली के आस पास फिर से ठण्ड बढ़ जाने के कारण पट बंद कर दिए जाते है |

यहां पर 130 डिग्री सैल्सियस पर खौलता एक तप्त कुंड और सूर्य कुण्ड है जहां पूजा से पूर्व स्नान आवश्यक समझा जाता है।

पञ्च बद्री या पांच बद्रियां

भगवान बद्रीनाथ की पूजा यहा पञ्च बद्री के रूप में की जाती है | मुख्य मंदिर विशाल बद्री के रूप में पूजा जाता है | योगध्यान बद्री , भविष्य बद्री , श्री वृद्घ बद्री, श्री आदि बद्री अन्य चार बद्री मंदिर है |

देखने लायक अन्य स्थान :

चरण पादुका : यह भगवान विष्णु के बालरूप  के पैरों के निशान हैं |

लक्ष्मी वन : यह वन लक्ष्मी माता के वन के नाम से प्रसिद्ध है।

सतोपंथ : इस जगह को स्वर्गारोहिणी भी कहते है  इसी जगह से राजा युधिष्ठिर स्वर्ग गये थे |

ब्रह्म कपाल : यह एक चबूतरा है जहा धार्मिक कार्यो को संपन्न किया जाता है |

भीम पुल : इस पुल का निर्माण भीम ने सरस्वती नदी को पार करने के लिए किया था | एक भारी चट्टान को नदी पर रखकर यह पुल बनाया गया |

माता मूर्ति मंदिर  : इसमे जो देवी है उन्हें बद्री भगवान की माता के रूप में पूजा जाता है |

इसके अलावा शेषनेत्र , अलकापुरी , वसु धारा , वेद व्यास गुफा आदि देखें लायक धार्मिक जगह है |

भगवान विष्णु और लक्ष्मी की तपोस्थली है बद्रीनाथ धाम
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