कैसे करे प्राणायाम और इसके कितने प्रकार है

How to do Pranayam in proper way  : प्राणायाम करने की सही विधि

प्राणायाम (प्राण +आयाम ) अर्थ प्राणों का विस्तार | श्वसन क्रिया द्वारा वातावरण के प्राण तत्वो को खिंचना और मानसिक , शारीरिक और लौकिक शक्तियों को स्वयं में बढ़ाना ही प्राणायाम है | श्‍वास और नि:श्‍वास की गति पर स्वयं का निरंतर प्राणायाम का आधार है |नित्य प्राणायाम करने से बड़ी से बड़ी बीमारी नष्ट हो जाती है |

प्राणायाम क्या है

आइये अब जानते है की कैसे किया जाता है प्राणायाम :

प्राणायाम के मुख्य तीन भाग :

प्राणायाम के मुख्य रूप से 3 भाग है  जो पूरक , कुम्भक और रेचक है |

1) पूरक-  अपनी श्वसन क्रिया में  श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। सांस को आप नियंत्रण करे | आप तेजी से या धीरे धीरे सांस भर सकते है |

(2) कुंभक-  प्राणायाम का दूसरा भाग है सांस को अन्दर रोके रहना | इस भाग में ना तो हम सांस लेते है ना ही  छोड़ते है |

(3) रेचक-  इस भाग में जो साँसे पहले से ली गयी है उन्हें नियंत्रित रूप से बाहर निकालना हटा है |

इन तीनो प्राणायाम की क्रिया का सही रूप और सही आवर्ती से करना ही प्राणायाम है |

प्राणायाम के कितने प्रकार  है ?

निचे मुख्य प्राणायाम के भाग दिए जा रहे है |

(1) नाड़ीशोधन, (2) भ्रस्त्रिका, (3) उज्जाई, (4) भ्रामरी, (5) कपालभाती, (6) केवली, (7) कुंभक, (8) दीर्घ, (9) शीतकारी, (10) शीतली, (11) मूर्छा, (12) सूर्यभेदन, (13) चंद्रभेदन, (14) प्रणव, (15) अग्निसार, (16) उद्गीथ, (17) नासाग्र ,( 18 ) प्लावनी, (19) शितायु


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