भोजन के है तीन प्रकार , सात्विक , राजसिक और तामसिक आहार

भोजन के कितने प्रकार है

हमारे सनातन धर्म में हर चीज को लेकर कुछ मान्यताये है जो वैज्ञानिक द्रष्टि से भी सही जान पड़ती है | हमारे मन और शरीर पर इस बात का भी बहुत फर्क पड़ता है की भोजन किस प्रकार का है और कितनी मात्रा का है | कहा भी गया है , “जैसा खाओगे अन्न , वैसा रहेगा मन ” | जीवन को आगे वाला और उर्जा देने वाला भोजन भी हिन्दू धर्म में तीन भागो में बांटा गया है | यह आहार के तीन भाग  सात्विक , राजसिक और तामसिक भोजन है | आइये जाने इन तीनो के बारे में विस्तार से |


bhojan ke prakaar

पढ़े : सनातन धर्म की महिमा में यह 10 बाते आपको जाननी चाहिए

सात्विक भोजन | Sattvic Food


इसमे ताजा, रसयुक्त, हल्की चिकनाईयुक्त और पौष्टिक भोजन आता है । इसमें अन्ना, दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, दही, हरी-पत्तेदार सब्जियाँ, फल-मेवा आदि शामिल हैं। सात्विक भोजन शरीर में जल्दी से  पचने वाला होता है। इसमे नारंगी , निम्बू  मौसमी का ज्यूस भी शामिल है  । यह सबसे अच्छा आहार है जो मन और शरीर को स्वस्थ रखता है |

राजसिक आहार | Rajasic Food

इस तरह के भोजन में लहसुन , प्याज , चाय , कोफी , अत्यधिक मसालेदार चीजे , मदिरा , शक्तिवर्धक दवाई आदि शामिल है |

तामसिक आहार | Tamasic Food

इसमे मांसाहार ,अंडा ,  बांसी खाना शामिल है | कही कही लहसुन और प्याज को भी तामसिक भोजन के अंतर्गत माना जाता है | यह मन को शरीर को सुस्त बनाता है और इन दोनो के प्रतिकूल है |

भोजन को लेकर ध्यान रखने योग्य बाते :

@ तनाव क्रोध में कभी भोजन ना करे | आहार हमेशा शांत और प्रसन्न होकर किया जाना चाहिए |

@ भोजन को शरीर की जरुरत के अनुसार खाना चाहिए ना की स्वाद के अनुसार |

@ भोजन के तुरंत बाद पानी ना पीये | आहार लेने से आधे घंटे और लेने के एक घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए |

@ नित्यमित व्यायाम और घुमने का भी ध्यान रखे |

@भोजन मौसम और जगह अनुसार करे |

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