खड़ाऊ पहनने के फायदे और महत्व

खड़ाऊ का महत्व और पहनने के फायदे

भारत में पादुका या खड़ाऊ का चलन बहुत पहले से है |  हमारे पूर्वज ऋषि मुनि  पैरों में लकड़ी के खड़ाऊ (चप्पल) पहनते थे। रामायण में भी खड़ाऊ का वर्णन मिलता है, भरत राम के वनवास गमन से पूर्व उनके  खड़ाऊ को सिर पर रखकर अयोध्या लाते है राजसिंहासन  पर उसे स्थापित कर राज पाट चलाते है | हमारे ऋषि मुनियों की यह देन खडाऊ वैज्ञानिक और धार्मिक कारणों से बहुत उपयोगी है |


खडाऊ पहनने से लाभ

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वैज्ञानिक पहलु

गुरुत्वाकर्षण और ऊष्मा का जो सिद्धांत वैज्ञानिकों ने जो बताया है उसे हमारे ऋषि मुनि बहुत पहले ही जान चुके थे | सिर पर चोटी रखने के फायदे , जनेऊ पहनने के पीछे लाभ , माथे पर तिलक लगाना , रक्षा सूत्र बांधना आदि बहुत सारी चीजे हमारे धर्म में प्राचीन काल से आई है जो धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों रूप से ही फायदेमंद है |

उस सिद्धांत के अनुसार शरीर में व्याप्त विद्युत तरंगे गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं ।

यह प्रक्रिया अगर निरंतर चले तो शरीर की जैविक शक्ति क्षीण  होने लग जाती है।

इस ऊष्मा को अवशोषण से बचाने के लिए हमारे पूर्वजो ने लकड़ी की चरण पादुका (खडाऊ ) को पहनने शुरू किया |

 

सामाजिक पहलु

प्राचीन समय में चमड़े का जूता कई धार्मिक, सामाजिक कारणों से समाज के एक बड़े वर्ग को मान्य न था और कपड़े के जूते का प्रयोग हर कहीं सफल नहीं हो पाया। जबकि लकड़ी के खड़ाऊ पहनने से किसी धर्म व समाज के लोगों के आपत्ति नहीं थीऔर वही पहने जाने लगे |

कालांतर में यही खड़ाऊ सिर्फ ऋषि-मुनियों के पहनावे से जुड़ गये है ।

कुछ विशेष लाभ

  • खडाऊ पहनने से सबसे बड़ा लाभ है की यह शरीर में रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाता है |
  • खडाऊ से मानसिक और शारीरिक थकान दूर होती है | यह पैरो की मासपेशियों को मजबूत बनाता है |
  • खड़ाऊ पहनने से आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और मजबूत बनती है जिससे स्लीप डिस्क के होने के बहुत कम चांस हो जाते है यह आपके पोस्चर को भी बैलेंस रखता है |

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