भोजन के समय मंत्र और नियम

हम सभी को भोजन की जरुरत होती है | यह हमारे शरीर को शक्ति देता है और जीवनदाता है | भोजन करते समय कुछ नियमो और बातो का जरुर ध्यान रखना चाहिए | यह सीख आध्याम्तिक और वैज्ञानिक दोनों रूप में सही होती है | भोजन करते समय पौष्टिक आहार काम में ले क्योकि माना जाता है |

जैसा खाओगे अन्न , वैसा रहेगा मन

पढ़े : ॐ नमः शिवाय मंत्र की शक्ति


भोजन के समय मंत्र

भोजन के समय मंत्र

भोजन से जुड़े मंत्र

भोजन करते समय आपका मुख्य पूर्व दिशा में होना चाहिए |

नीचे दिया हुआ मंत्र बोलकर भोजन को प्रणाम करें।  भोजन के रूप में हम अन्न देवता को नमन कर रहे है | अब प्रथम ग्रास देवताओं और गौ माता के लिए निकालकर फिर जल से चुलू कराये फिर  भोजन करना चाहिए | प्रभु से विनती करनी चाहिए की हे , ईश्वर आपने भोजन उपलब्ध कराया आपका धन्यवाद |


ईश्वर से यह भी कहे की हे ईश्वर इस दुनिया में कोई भूखा नही रहे |

भोजन करने से पहले बोले जाने वाले मंत्र

ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना ।।

भोजन कर लेने के बाद इस मंत्र का जप करते हुए खाने की थाली को वंदन करें। थाली में उतना ही खाना ले जितना आप खा सके | यदि फिर भी भोजन बच भी जाए तो उसे कचरें में ना  फेंके बल्कि किसी जानवर को खिला दे |

भोजन करने के बाद पढ़े यह मंत्र

अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।
यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।

भोजन के समय ध्यान रखे इन बातो का

  • भोजन करने से पूर्व दोनों हाथो , पैरो और मुख को जल से धोकर ही भोजन करे |
  • भोजन बनाने वाले को सबसे पहले तीन भाग गाय माता , कुत्ते और कोवे के लिए निकालने चाहिए |
  • फिर अग्नि देव को भोग लगाये फिर परिवार को खाना परोसे |
  • यदि परिवार एक साथ भोजन करेगा तो आपस में प्यार , सम्मान और एकता  अधिक बढेगी  |
  • खड़े खड़े और जूते पहन कर कभी भोजन ना करे |
  • भोजन कैसा भी हो देवता के तुल्य है अत: कभी भोजन की बुराई ना करे |
  • कभी भी बिस्तर पर भोजन ना करे , इससे आपको बुरे सपने आने लगेंगे | पढ़े : डरावने और बुरे सपनो से बचने के उपाय
  • किसी पीपल पेड़ और वट वृक्ष के निचे बैठकर भोजन ना करे | इससे नकारात्मक शक्तियाँ आपके साथ हो जाएगी |


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