पापमोचनी एकादशी महत्व – सभी पापो से मुक्ति प्राप्ति का दिन

PaapMochani Ekadashi Fast Story and Importance

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि पापमोचनी एकादशी , पापो से मुक्ति दिलाने वाला दिवस है | चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कोई व्यक्ति विधि विधान से  इस  व्रत को करता है तो उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते है | यह व्रत इस साल 2019 में 31 मार्च को आ रहा  है | इसके महात्मन के  बारे में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया था |

पाप मोचनी एकादशी का दिन महत्व

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कैसे करे पापमोचनी एकादशी पर विष्णु पूजा

इस एकादशी की सुबह नहा धोकर शुद्ध वस्त्र पहने फिर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर इस व्रत का संकल्प ले और पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा सुने और भगवान विष्णु से अपने पापो से मुक्ति प्राप्ति की विनती करे एकादशी का व्रत नियम से करे और रात्रि में जागरण कर विष्णु महिमा में बिताये  और अगले दिन द्वादशी पर एकादशी व्रत का पारण करे |

व्रत करने वाले व्यक्ति को दशमी से ही अपने मन तन कि शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए और मन को विष्णु भक्ति में समर्प्रित करना चाहिए | उसका आहार भी दशमी से सात्विक होना चाहिए |

पाप मोचनी एकादशी की कथा

एक बार राजा मान्धाता ने लोमश ऋषि से अनजाने पाप कर्म से मुक्ति का मार्ग पूछा तब लोमश ऋषि ने राजा को एक कहानी सुनाई |

अप्सरा ने कि साधू कि तपस्या भंग

चैत्ररथ नामक सुन्दर वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या में लीन थे | एक बार स्वर्ग की अप्सरा  मंजुघोषा उनपर मोहित हो गयी और अपने प्रयत्नों से ऋषि को कामपीड़ित कर गयी |

सालो तक ऋषि उसके प्रेम में उसके साथ रमण करने लगे , वे अपने तप और जीवन के लक्ष्य को भूल चुके थे | एक दिन उनकी आंतरिक चेतना जगी और वे स्वयं पर और उस अप्सरा पर अत्यंत क्रोधित हुए | उन्होंने अप्सरा को  पिशाचनी होने का श्राप दे दिया | श्राप से दुखी होकर वह ऋषि के पैरों पर गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति के लिए अनुनय करने लगी.

उसकी करुण याचना से पिघल कर ऋषि ने उसे विधि सहित चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने और विष्णु पूजा विधि विधान से करने का मार्ग बताया | उस पिशाचनी ने विधि विधान से पापमोचनी व्रत किया और अपने पापो से मुक्ति पाई और फिर से स्वर्ग की अप्सरा बन गयी |

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