नरक चतुर्दशी कथा महत्व और पूजा विधि

Narak Chaturdashi Puja Vidhi , Mahatav नरक चतुर्दशी का त्यौहार प्रतिवर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाया जाता हैं. इसे भारत के प्रसिद्ध त्यौहार दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता हैं |


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नरक चतुर्दशी कथा महत्व

इस दिन मुख्य रूप से मृत्यु के देवता यमराज जी की पूजा – अर्चना की जाती हैं.
नरक चतुर्दशी के विभिन्न नाम (Different names of Narak Chaturdashi)  कुछ व्यक्ति इसे छोटी दीपावली कहते हैं. क्योंकि यह दीपावली से एक दिन पहले ही मनाया जाता हैं. कुछ लोग इसे नरक चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी ,काली चौदस आदि नामों से जानते हैं. तो कुछ इसे नरक पूजा तथा नर्क चतुर्दशी के नाम से जानते हैं.नरक चतुर्दशी पूजा विधि


नरक चतुर्दशी रूप चौदस की कथा

प्राचीन काल में एक नरकासुर नाम का राजा था. जिसने देवताओं की माता अदिति के आभूषण छीन लिए थे. वरुण देवता को छत्र से वंचित कर दिया था, मंदराचल के मणिपर्वत शिखर पर अपना कब्ज़ा कर लिया था तथा देवताओं, सिद्ध पुरुषों और राजाओं की 16100 कन्याओं का अपहरण कर उन्हें बंदी बना लिया था.

narkasur vadh krishnaकहा जाता हैं कि दुष्ट नरकासुर के अत्याचारों व पापों का नाश करने के लिए श्री कृष्ण जी ने नरक चतुर्दशी के दिन ही नरकासुर का वध किया था और उसके बंदी ग्रह में से कन्याओं को छुड़ा लिया. कृष्ण जी ने कन्याओं को नरकासुर के बंधन से तो मुक्त कर दिया. लेकिन देवताओं का कहना था कि समाज इन्हें स्वीकार नहीं करेगा. इसलिए आप ही इस समस्या का हल बताये. यह सब सुनकर श्री कृष्ण जी ने कन्याओं को समाज में सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा की सहायता से सभी कन्याओं से विवाह कर लिया.

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छोटी दिवाली पूजा विधि -Worship Method on Small Diwali Day

1.इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल या उबटन लगाकर मालिश करने के बाद स्नान करना चाहिए. ऐसा माना जाता हैं कि जो व्यक्ति नरक चतुर्दशी के दिन सूर्य के उदय होने के बाद नहाता हैं. उसके द्वारा पूरे वर्ष भर में किये गये शुभ कार्यों के फल की प्राप्ति नहीं होती.

2. सूर्य उदय से पहले स्नान करने के बाद दक्षिण मुख करके हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें. ऐसा करने से व्यक्ति के द्वारा किये गये वर्ष भर के पापों का नाश होता हैं.

3. नरक चतुर्दशी की शाम को सभी देवताओं की पूजा करने के बाद तेल के दीपक जलाकर घर के दरवाजे की चोखट के दोनों ओर, सड़क पर तथा अपने कार्यस्थल के प्रवेश द्वारा पर रख दें. ऐसा माना जाता हैं कि इस दिन दीपक जलाने से पूरे वर्ष भर लक्ष्मी माता का घर में स्थाई निवास होता हैं.

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