मोक्षदा एकादशी व्रत कथा , महत्व और विधि विधान

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन आने वाले दिन का महत्व अत्यंत है , इसी दिन कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीताका उपदेश दिया था। अत:यह तिथि गीता जयंती के नाम से प्रसिद्ध हो गई है । इस दिन से गीता-पाठ का अनुष्ठान प्रारंभ करें और नित्य थोडा समय गीता अवश्य पढें। इस परम ज्ञान से आपकी अज्ञानता दूर होगी |

जो व्यक्ति पूर्ण समर्पण से इस कल्याणमयी मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। व्रती को सांसारिक मोह से मुक्ति देने वाली यह एकादशी चिन्तामणि के समान समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा पढने-सुनने से वाजपेययज्ञ का पुण्यफलमिलता है।मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा और महत्व

जो व्यक्ति एकादशी का नियम पूर्वक व्रत अपने पितृ देवी देवताओ  की मुक्ति के उद्देश्य से करता है , उसे इसका शत प्रतिशत फल प्राप्त होता है  |

पौराणिक कथा के अनुसार चंपा नगरी में एक प्रतापी राजा वैखनास रहते थे, मान्यता है कि उन्हें सभी वेदों का ज्ञान था। उनके प्रताप के कारण उनकी जनता बहुत प्रसन्न रहती थी। एक दिन राजा ने सपने में देखा कि उनके पिता नरक में यातनाएं झेल रहे हैं। अपने इस सपने के बारे में उन्होनें अपनी पत्नी को बताया और कहा कि मैं यहां सुख से हूं और मेरे पिता को इतना कष्ट है। इसपर राजा की पत्नी ने उन्हें आश्रम में जाने की सलाह दी। राजा जब आश्रम पहुंचे तो उन्होनें कई तपस्वियों को देखा।

राजा ने अपनी बात वहां मौजूद पर्वत मुनि को बताई और अपनी परेशानी बताते हुए राजा की आंखों से आंसू आने लगे। इसके बाद पर्वत मुनि से सारा सच जाना और राजा को कहा कि तुम एक पुण्य आत्मा हो, जो अपने पिता के लिए इतने परेशान हो, लेकिन परेशान होने की जरुरत नहीं है तुम्हारे पिता अपने कर्मों का फल भोग रहे हैं। तुम्हारे पिता ने तुम्हारी माता को बहुत यातनाएं दी हैं। इसी पाप के कारण वो नरक भोग रहे हैं। राजा ने मुनि से इस परेशानी का हल पूछा तो मुनि ने कहा कि तुम्हें मोक्षदा एकादशी व्रत का पालन करना चाहिए और इसे पिता को फल समर्पित करना चाहिए। इससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। राजा ने इसी विधि का पालन किया और उनके पिता सभी बुरे कर्मों से मुक्त हो गए।

विधि विधान

सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पुरे दिन उपवास या आंशिक उपवास रखे | सुबह और शाम भगवान विष्णु के मंत्र का जप करे |  द्वादशी के दिन एकादशी व्रत का पारण करे |

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