मत्स्य जयंती पर विष्णु का मछली रूप में अवतार लेना

जब जब धरती पर पाप बढ़ा तब तब भगवान विष्णु ने अधर्म पर धर्म की विजय के लिए अवतार लिए है | ये मानव , जीव रूप और मिश्र रूप में लिए गये है | भगवान विष्णु ने सबसे पहला अवतार यही मत्स्य का लिया था |

कब आती है मत्स्य जयंती ?

मत्स्य जयंती चैत्र मास की शुक्ल तृतीया तिथि को आती है | इसे हयपंचमी भी पुकारा जाता है | इसी तिथि को विष्णु जी ने मत्स्यावतार लेकर दैत्यों द्वारा चुराए गये वेदों की रक्षा कर अधर्म पर धर्म की जीत दिलाई थी |

मत्स्य अवतार की कहानी

भगवान विष्णु का यह अवतार सृष्टि के अंत में हुआ था जब प्रलय काल आने में कुछ वक्त बचा था। सत्यव्रत मनु जिनसे मनुष्य की उत्पत्ति हुई धर्मात्मा और भगवान विष्णु के परम भक्त  थे। एक दिन नदी स्नान और पूजा के बाद उनके कमंडल में एक छोटी सी मछली आ गयी |

उस छोटी सी मछली को लेकर मनु अपने राजमहल लौट आए। वह मछली धीरे धीरे बहुत बड़ी होने लगी | लगातार बढ़ते आकार को देखकर मनु ने उसका परिचय पूछा |

तब श्री हरि मछली से प्रकट हुए और बताया कि आज से 7 दिन बाद प्रलय आने वाला है सृष्टि की रक्षा के लिए मैंने यह अवतार लिया है। यह सम्पूर्ण धरती जल मग्न हो जाएगी अत: आपको परिवार सहित यहा से निकलना है ।

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प्रलय आने से पहले भगवान सत्यव्रत के पास आए और उनसे कहा कि आप अपनी नाव को मेरे शरीर पर बांध दीजिए। सत्यव्रत परिवार , सप्त ऋषि और सभी प्रकार के बीज और औषधि सहित नाव में  सवार हो गए | मत्स्य अवतार में भगवान ने चारों वेदों को अपने मुंह में दबा  रखा था और वे धरती के जलमग्न के समय सुरक्षित निकल गये | और जब पुनः सृष्टि का निर्माण हुआ तो ब्रह्मा जी को वेद सौंप दिए। इस तरह भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर प्रलय काल से लेकर सृष्टि के फिर से निर्माण का काम पूरा किया।

क्या करे इस दिन

इस दिन मछलियों को आटे की गोलियां खिलानी चाहिए और भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा को पढना या सुनना चाहिए | यदि आप किसी गहरे संकट में है तो भगवान विष्णु से रक्षा के लिए विनती करनी चाहिए |

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