मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व और व्रत विधि

मार्गशीर्ष अमावस्या की महिमा और महत्व

Margashirsha Amavasya 2018 Importance

मार्गशीर्ष अमावस्या को ‘अगहन अमावस्या’ के नाम से भी जाना जाता है।  यह कार्तिक मास की अमावस्या के बाद आने वाली मावस है | इस दिन व्रत करने से कुंडली के दोष दूर होते है और ग्रह प्रसन्न होते है |


मार्गशीर्ष अमावस्या उपाय

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अमावस्या का दिन पितरो का दिन माना जाता है अत: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान , पितरो के लिए तर्पण और दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है | इस साल यह अमावस्या 7 December को आ रही है |

व्रत विधि और इसका महत्व

इस दिन सुबह पितरो के लिए व्रत लेने का संकल्प ले और फिर पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करे | पितरो के निर्मित तर्पण,  दान , दीप प्रज्वलित करे | संध्या को नजदीकी शिवालय में जाकर शिवलिंग के सामने दीपक जलाये और पितरो की शांति की विनती करे | इस दिन सत्यनारायण की पूजा और आरती  करने का भी विधान है |

कृष्ण भगवान ने इसी महीने में दिया था गीता का संदेश
मार्गशीर्ष महीने में कुरुक्षेत्र के मैदान में श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का बहुमूल्य ज्ञान दिया था | वो दिन गीता जयंती के रूप में जाना जाता है जो अगहन मास की शुक्ल एकादशी के दिन मनाया जाता है |


पितरो के लिए व्रत और तर्पण महत्व
पितृ पक्ष में आने वाली अमावस्या सर्वपितृ अमावस्या के फल के समान ही  मार्गशीर्ष माह की अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त व्रत रखने और जल से तर्पण करने से पितृ पक्ष प्रसन्न होते है और पितृ दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है ।
amawasya pitra paksh
सिर्फ पितृ ही नही , इस दिन व्रत रखने से ब्रह्मा, इंद्र, रूद्र, अश्विनीकुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षियों सहित सभी प्राणी तृप्त होते है |

पूजा विधि

मार्गशीर्ष मास की महिमा के बारे में स्वयं श्री कृष्ण ने बताया था की वे सभी  मासों में मार्गशीर्ष है | अत: इस अमावस्या के दिन यदि उनकी प्रिय नही यमुना के जल में स्नान किया जाये तो उसका महापुण्य प्राणी को प्राप्त होता है |
स्नान के बाद पवित्र जल में दीप दान करे और फिर जरुरतमंदों को अन्न , धन वस्त्र का दान करे |

मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि

मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि गुरुवार 6 दिसंबर 2018 को 12:12 मिनट से आरंभ होगी तथा 7 दिसंबर 2018, शुक्रवार को 12:50 मिनट पर समाप्त होगी।

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