महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ? इसके पीछे है बहुत से कारण , जाने इस व्रत का महत्व और कहानी

Kyo Manai Jati Hai MahaShivratri – Know Story and Importance about this fast .

शिव पूजन का सबसे पावन दिन और रात महाशिवरात्रि को बताया गया है | यह भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम दिन है | फाल्गुन कृष्ण पक्ष में आने वाली प्रदोष के अगले दिन शिवरात्रि मनाई जाती है | इस दिन के महत्व को लेकर 3 मत बहुत प्रचलित है |

शिवरात्रि से जुड़ी रोचक बाते

1 शिव पार्वती विवाह का दिवस

शैव भक्तो में बहुत से भक्त यह मानते है कि शिव और पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था | पार्वती की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने  यह विवाह सम्पन्न पूर्ण किया |

2 शिव निराकार से साकार रूप में

ईशान संहिता के अनुसार इस दिन भगवान  शिव प्रकट हुए थे | पर कई जानकारों का मानना है कि शिव आदि और अंत से बहुत परे है और स्वयम्भू हूँ |

3 देवी देवताओ ने किया पूरी रात जागरण

नीलकंठ महादेव

एक अन्य शास्त्रों में बताई कथा के अनुसार समुन्द्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिवजी ने अपने कंठो में धारण करके समस्त ब्रहमांड की रक्षा की थी | पर इस हलाहल विष के प्रभाव से वे तड़प उठे | तब महान ऋषियों ने देवताओ को पूरी रात शिवजी को जल दूध और बिल्वपत्र का पान कराने का सुझाव दिया | ऋषियों के कहे अनुसार शिवजी के जयकारो के साथ उनके विष के प्रभाव को कम करने के लिए ये प्रयास सारी रात किये गये | भोर होने तक शिवजी उन सभी से अत्यंत प्रसन्न हुए | तभी से शिवरात्रि का पर्व धूम धाम से मनाया जाने लगा |

महाशिवरात्री व्रत का महत्व और कहानी

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि ।

शिवलिङ्गतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभ।।

अर्थात :- फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में आने वाली महारात्रि  को शिवजी शिवलिंग रूप में करोड़ो सूर्य के तेज के समान प्रकट हुए थे | अत: इस दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करने से अनेको संताप , दुःख दर्द का हरण होता है | इस दिन का व्रत और पूजा हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर आदि विकारों से मुक्त करके परमसुख, शान्ति एवं ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।

स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन शिवलिंग के दर्शन कर अभिषेक और बिल्व पत्रों और शमी पत्रों  को अर्पित करने से मनुष्य करोड़ो पुण्यो के बराबर फल प्राप्त करता है | शिवरात्रि की रात जो शिवजी के मंत्रो का  जप और शिव महापुराण का पाठ करता है , वो शिवलोक को प्राप्त करता है |

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