कैसे किया जाता है घर में तुलसी जी का विवाह

तुलसी जी का विवाह उसी तरह किया जाता है जैसे किसी कन्या का विवाह संपन्न होता है | तुलसी जी को बेटी के समान मानकर उसे भगवान शालिग्राम जी के साथ विवाह के बंधन में बांध दिया जाता है | हमारे धर्म ग्रंथो में बताया गया है की जिनके घर में कन्या नही होती उन्हें अपने जीवन में एक तुलसी विवाह या किसी अन्य कन्या का कन्यादान जरुर कराना चाहिए |

पढ़े : क्यों किया जाता है तुलसी जी विवाह विष्णु (शालिग्राम ) के साथ

 

Tulsi vivah

कब किया जाता है तुलसी शालिग्राम विवाह

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी जी और भगवान शालिग्राम जी का विवाह कई घरो में सम्पन्न कराया जाता है | शास्त्रों में बताया गया है की तुलसी जी विष्णु प्रिया है और इनके बिना विष्णु जी की कोई पूजा सम्पन्न नही मानी जाती है |

आइये जानते है कैसे किया जाता है तुलसी जी का विवाह

  1. तुलसी जी  के गमले को एक सजे हुए पटिये  पर विराजित किया जाता है | इसे घर के आँगन या हाल में बिलकुल बीच में रखे |
  2. तुलसी जी के पौधे को लाल चुनरी ओढाई जाती है |
  3. इनका एक दुल्हन की तरह श्रंगार किया जाता है |
  4. गमले के चारो तरफ विवाह का मंडप बनाते है | इस मंडप के चारो कोनो में गन्ने लगाये जाते है |
  5. गाजे बाजे के साथ पास के मंदिर से शालिग्राम जी की बारात आती है |
  6. शालिग्राम जी के साथ आये पंडित तुलसी के घर पर तोरण मारते है |
  7. सादर सत्कार के साथ शालिग्राम जी और बारात को घर में प्रवेश करके आवभगत की जाती है |
  8. फिर शालिग्राम जी को तुलसी जी के साथ विराजित कर पंडित लोग मंत्रो के साथ विवाह को संपन्न कराते है |
  9. तुलसी के फेरे कराये जाते है |
  10. आस पास की महिलाये तुलसी जी को साडी , चांदी सोने के आभूषण भेट करती है |
  11. अंत में तुलसी जी को विदा कर दिया जाता है |

इस तरह यह देविक विवाह हर्षो उल्लास के साथ संपन्न होता है |


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