गोपाष्टमी पर्व – गाय और गोविंद की पूजा का दिवस

गोपाष्टमी पर्व का महत्व और जुड़ी बाते

Gopashtami Festival भगवान श्री कृष्ण को गोपाल , गोविन्द आदि नामो से जाना जाता है | वे बचपन में ब्रज भूमि और गोवर्धन पर्वत पर गौ माताओं को चराया करते थे | कार्तिक मास की शुक्ल अष्टमी को आने वाला पर्व गोपाष्टमी गोविन्द और गौ पूजा का दिन माना जाता है |

इस साल 2018 में यह पर्व 16 November शुक्रवार को मनाया जायेगा |

गोपाष्टमी पर्व गाय पूजा

क्यों इसी दिन मनाया जाता है गोपाष्टमी का पर्व

कृष्ण बचपन में अपनी मैया से विनती किया करते थे कि उन्हें गौ चराने की आज्ञा मिले | अपने बालक की जिद्द के कारण माँ यशोदा ने ऋषि शांडिल्य से कहकर गौ चराने का मुहूर्त निकलवाया | ऋषि शांडिल्य ने कार्तिक माह की शुक्ल अष्टमी का विधान बताया | तब सबसे पहली बार कृष्ण इसी दिन गाय माता को चराने घर से निकले थे | तभी से यह दिवस गौ और गोविन्द की पूजा का दिन बन गया |


गौ माँ की महिमा अपार

हिन्दू धार्मिक शास्त्रों में गाय में 33 कोटि देवी देवताओ का वास बताया गया है | गौ माँ  की महिमा इतनी अनंत है जिसकी कोई सीमा नही | गौ माँ की पूजा से सभी देवी देवताओ को प्रसन्न किया जाता है | यहा तक की गौ माँ का कण कण पवित्र है |

gau maa

कैसे करे गोपाष्टमी पर पूजा


– ब्रहम मुहूर्त में स्नान कर गौ माँ और उसके बछड़े को स्नान कराये | दोनों का फिर श्रंगार करे | पाँव में घुंघुरू पहनाये |

– गौ माँ को इस दिन हरा चारा , गुड खिलाये | गाय माता पर गंगा जल का छिडकाव कर उन्हें माला पहनाये |

-एक दीपक जलाकर गौ माँ को बारम्बार प्रणाम करे |

-गौ शाला और गोपालो को दान करे |

कहते है इस दिन गौ माँ की पूजा से करने से भगवान श्री कृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते है और व्यक्ति को मृत्यु बाद गौलोक में जगह प्राप्त होती है |

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