एकादशी व्रत का नियम और विधि

एकादशी व्रत या उपवास का महत्व वैष्णव संप्रदाय के भक्तो के लिए बहुत खास है | वे कृष्ण और विष्णु प्रेमी है | वे एकदशी के दिन नियमो का पालन करते हुए व्रत और उपवास रखते है | भगवान विष्णु , श्री कृष्ण की भक्ति करते है और अगले दिन द्वादशी पर अपना व्रत उपवास खोलते है | एकादशी व्रत नियम और विधि


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कब आती है एकादशी

हर माह के शुक्ल पक्ष को 11 ग्यारवे दिन एकादशी आती है | इस दिन किया गया व्रत सूर्योदय से शुरू होकर द्वादशी के सूर्योदय तक चलता है |

एकादशी व्रत करने के लिए नियम और विधि

  • एकादशी के एक दिन पूर्व दशमी को कोई तामसिक भोजन (लहसुन , प्याज ,मांस , मदिरा ) ना खाए |
  • व्रत जब तक चले , मन में अच्छे विचार रखे | भोग विलास से दूर रहे | ब्रह्मचर्य का  पालन करे |
  • वाणी मधुर रखे | किसी की निंदा और गुस्सा ना करे |
  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर दैनिक कार्य कर नहा ले और स्वच्छ वस्त्र धारण करके गीता का पाठ करे |
  • व्रत करने वाले व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि चीजो का सेवन नही करना चाहिए |
  • यह सिर्फ भूख का ही नही , हमारी इन्द्रियों का भी व्रत है |
  • भगवान कृष्णा और विष्णु के मंत्रो का जाप करे |
  • एकादशी के दिन चावल नही खाने चाहिए , इस दिन इसे माँस के बराबर माना जाता है |
  • महिलाओ को इस दिन झाड़ू नही लगानी चाहिए , क्योकि इससे जीव हत्या हो सकती है |
  • उपवास को द्वादशी पर तोडना चाहिए , उस दिन जो भी खाए उसमे तुलसी दल  जरुर डाले |
  • द्वादशी के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दे |
  • एकादशी पर बाल नाख़ून नही काटे |
  • सुबह और शाम को अपने आराध्य विष्णु के रूप की ॐ जय जगदीश आरती करे |

कैसे खोले एकादशी व्रत को

इस व्रत को अगले दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है | आप चरणामृत और फलाहार जिसमे तुलसी पत्ते रखे हुए हो , से व्रत को तोड़ सकते है |

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