दिवाली की रात क्यों बनाया जाता है काजल?

भारत में सबसे बड़े त्योहार के रूप में दीपावली को जाना जाता है | यह पर्व साफ़ सफाई , रोशनी और प्रेम बाँटने का पर्व है | इस दिन को लेकर कई मान्यताये भी सदियों से चली आ रही है , जिसमे से एक है दीपावली की रात को काजल बनाकर घर के सभी सदस्यों की आँखों में लगाना | दीपावली की संध्या को गणेश संग लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और पूरी रात अखंड दीपक जलाया जाता है जिससे सुबह काजल बनाया जाता है |

दीपावली की रात काजल का महत्व

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दिवाली को लेकर क्या हैं मान्यताएं?

इस दिन भगवान श्री राम अपने चौदह साल के वनवास को पूर्ण कर अपनी नगरी अयोध्या धाम आये थे | उनके संग सीता जी  , लक्ष्मण भी थे | अयोध्यावासियों ने उनका स्वागत दीपक जलाकर किया था | तभी से यह दीपोत्सव के रूप में मनाया जाता है | महाभारत काल में इसी दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था और ब्रज वासियों ने भी इस संध्या पर दीपक जलाये थे |

दिवाली पर क्यों बनाया जाता है काजल?

मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या अर्थात दीपावली की रात को बनाया गया काजल नकारात्मक शक्तियों से बचाव करता है | इसे आप रसोई , तिजोरी के अन्दर लगाकर घर में सुख समृधि बढ़ा सकते है | इसे आँख पर लगाने से सेहत अच्छी होती है |

making kajal

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इस काजल का वैज्ञानिक महत्व भी है –

दीपावली के दिनों में आतिशबाजी के कारण वातावरण प्रदूषित हो जाता है | इस प्रदुषण का असर हमारी आँखों पर भी पड़ता है | कहते है दीपावली की रात घी के दीपक से बनाया हुआ यह काजल इसमें बहुत फायदा पहुँचाता है | आँखों में होने वाली जलन और पानी निकलने की समस्या को यह दूर करता है |

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