भैया दूज पर्व का पौराणिक महत्व और महिमा

दीपावली के साथ ही भाई-बहन के पावन प्रेम की प्रतीक भैया दूज (भाई द्वितीया ) का अपना विशेष महत्व है। भारतीय बहनें इस पर्व पर भाई की मंगल कामना कर अपने को धन्य मानती हैं। भैयादूज हिन्दू समाज में भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक है| यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है| भाई-बहन के पवित्र रिश्तों के प्रतीक के पर्व को हिन्दू समुदाय के सभी वर्ग के लोग हर्ष उल्लास से मनाते हैं|

भाई बहिन का प्रेम पर्व

इस पर्व पर जहां बहनें अपने भाई की दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना करती हैं तो वहीं भाई भी सगुन के रूप में अपनी बहन को उपहार स्वरूप कुछ भेंट देने से नहीं चूकते| इस पर्व पर बहनें प्राय: गोबर से मांडना बनाती हैं, उसमें चावल और हल्दी के चित्र बनाती हैं तथा सुपारी फल, पान, रोली, धूप, मिष्ठान आदि रखती हैं, दीप जलाती हैं। इस दिन यम द्वितीया की कथा भी सुनी जाती है| मृत्यु क देवता यमराज और उनकी बहिन यमुना के प्रेम पर समर्पित यह त्यौहार मनाया जाता है | भाई दूज पर्व

पढ़े : दीपावली की पौराणिक कथा और महत्व


भैयादूज में दान का महत्व –

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान के साथ दान का विशेष महत्व है| दान में केवल मानव ही नही पशु पक्षी भी सम्मिलित होतें हैं | भाई दूज के दिन किसी निर्धन या विद्वान ब्रह्मण को भोजन करना चाहिए, साथ ही गाय, कुत्ता व पक्षियों को भी यथायोग्य भोजन दिया जाये| परिवार के सभी लोग सूर्य को जल दें, जो बहनें व्रत रखती हैं, वह दोपहर बाद भोजन कर सकती हैं, लेकिन जब तक भाई की आरती कर लें| भाई को चाहिए जी वो सामर्थ्य के अनुसार अपनी बहिन को उपहार अवश्य दे और यदि बहन किसी संकट में है तो उसे उस स्तिथि से उभारे |


Other Similar Posts

दीपावली पर अचूक उपाय और टोटके

धनतेरस पर धन प्राप्ति के उपाय और टोटके

गजानंद गणेश से जुडी 12 रोचक बाते

मौत के देवता यमराज का मंदिर – मंदिर में प्रवेश करने से डरते है लोग

वास्तु उपाय – घर में कौन से पौधे लगाएं और कौन से नहीं

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *