अहोही अष्टमी व्रत विधि , कथा और महत्व

संतान के लिए माँ करती है अहोही अष्टमी का व्रत

Ahoi Ashtami Puja Vidhi | Ahoi Ashtami Vrat Vidhi | Ahoi Ashtami  Mahatav  धार्मिक शास्त्रों में कई व्रत ऐसे है जो महिलाये अपने पति की मंगलकामना के लिए करती है | पर अहोही अष्टमी का व्रत महिलाओ अपनी संतान के कल्याण (welfare of children) के लिए करती है |


अहोही अष्टमी व्रत कथा विधि महत्व

कब आता है अहोही अष्टमी व्रत   :

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है । इस साल 2018 में यह व्रत  31 अक्टूबर बुधवार  को आ रहा है |

व्रत से जुड़ी मुख्य बाते

यह व्रत निर्जला रहकर किया जाता है | रात्रि में चन्द्र देवता के दर्शन कर ही व्रत खोला जाता है | व्रत का उद्देश्य अपने बच्चो का कल्याण और उनकी लम्बी उम्र की अहोही माँ से विनती करना है |

अहोही व्रत की कथा

दंतकथा के अनुसार एक बार एक औरत अपने 7 पुत्रों के साथ एक गाँव में रहती थी। एक दिन कार्तिक महीने में वह औरत मिटटी खोदने के लिए जंगल में गयी। वह पर उसने गलती से एक पशु के शावक की अपनी कुल्हाड़ी से हत्या कर दी।​ahohi ashtami

उस घटना के बाद उस औरत के सातों पुत्र एक के बाद एक मृत्यु को प्राप्त हो गए। इस घटना से दुखी हो कर उस औरत ने अपनी कहानी गाँव की ही एक दूसरी औरत को सुनाई। एक बड़ी औरत ने उस औरत को यह सुझाव दिया की वह माता अहोई की आराधना करे। पशु के शावक की सोते हुए हत्या के पशाताप के लिए उस औरत के शावक का चित्र बनाया और माता अहोई के चित्र के साथ रख कर उनकी पूजा करने लगी। उस औरत ने 7 वर्षों तक अहोई अष्टमी का व्रत रखा और आखिर में उसके सातों पुत्र फिर से जीवित हो गए।

 

व्रत विधि

-प्रातः स्नान करके अहोई माँ (पार्वती जी ) की पूजा का संकल्प लें | माँ का चित्र दिवार पर गेरू या लाल रंग से बनाये | साथ ही एक छोटा सा बालक का चित्र बना सकते है |

-पुरे दिन व्रत रखे और हो सके तो निर्जल ही रहे |

– संध्या पर तारे निकलने पर अहोही माँ की पूजा बनाये गये चित्र के आगे बैठ कर करे |अहोही व्रत की कथा पढ़े और फिर माँ को हलवा का भोग लगाये | माँ से विनती करे कि आपकी संतान की हर पीड़ा उससे दूर हो |

-चन्द्रमा को अर्घ्य दे |

-घर में बड़ी महिलाओ का आशीर्वाद ले |

-अब व्रत खोले और भोजन कर ले |

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