आमलकी एकादशी महत्व | व्रत कथा | पूजा विधि

आमलकी एकादशी महत्व | व्रत कथा | पूजा विधि

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की ‘आमलकी एकादशी’ का माहात्म्य हमें पुराणों और धर्मशास्त्रो से प्राप्त होता है | इस एकादशी पर किया जाने वाला व्रत 84 लाख योनियों में भटकाव को खत्म कर मोक्ष की प्राप्ति कराता है |  आमलकी यह “आंवला ” के लिए आया है | इस दिन आंवले की विशेष पूजा की जाती है | हमने पहले भी बताया था की भारत में पूजनीय और धार्मिक वृक्ष में आंवले के पेड़ का भी अहम स्थान है |आमलकी एकादशी की महिमा

पढ़े : वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, कथा व महत्व

पढ़े : शनिवार के दिन भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, शनिदेव होते हैं नाराज

आमलकी एकादशी की कथा

इस संदर्भ में एक राजा की कथा का उल्लेख किया गया है जो पूर्व जन्म में एक शिकारी था।

एक बार आमलकी एकादशी के दिन जब सभी लोग मंदिर में एकादशी का व्रत करके भजन और पूजन कर रहे थे तब मंदिर में चोरी के उद्देश्य से वह मंदिर के बाहर छुप कर बैठा रहा।

मंदिर में चल रही पूजा अर्चना देखते हुए वह लोगों के जाने का इंतजार कर रहा था। अगले दिन सुबह हो जाने पर शिकारी घर चला गया।

इस तरह अनजाने में शिकारी से आमलकी एकादशी का व्रत हो गया। कुछ समय बाद शिकारी की मृत्यु हुई और उसका जन्म राज परिवार में हुआ।

एकादशी व्रत करते समय ध्यान रखे कुछ नियम

आमलकी एकादशी व्रत विधिः

एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु एवं आंवले के वृक्ष की पूजा करें। अगर आंवले का वृक्ष उपलब्ध नहीं हो तो आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद स्वरूप अर्पित करें।

घी का दीपक जलकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग व्रत नहीं करते हैं वह भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें और स्वयं खाएं भी।

शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन भी पाप का नाश करता है।

Other Similar Posts 

जया एकादशी उपवास का महत्व , व्रत कथा , पूजा विधि

2018 में आने वाली एकादशी व्रत शुक्ल और कृष्ण पक्ष

एकादशी के 8 चमत्कारी उपाय, जो करेंगे आपकी इच्छा पूरी

एकादशी पर कौनसे काम करना वर्जित है , यदि करेंगे तो लगेगा पाप

क्यों एकादशी पर चावल नही खाने चाहिए

जलझूलनी एकादशी का महत्व और व्रत कथा

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *