देवताओ की देव दिवाली

देवताओ की दिवाली

देव दिवाली अर्थात देवताओ द्वारा दिवाली का त्यौहार मनाया जाना | शास्त्र कहते है इस दिन देवी देवता दिवाली बनाने गंगा के घाटो पर आते है दीपक जलाते है | वे अद्रश्य रूप में स्वर्ग से आकर इस त्यौहार को मनाते है |


देवी देवताओ की दिवाली

कब आती है देव दिवाली :

दिवाली के पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को  यह आती है |

देव दिवाली पर देवता क्यों प्रसन्न होते है :

 इस दिन देवी देवताओ को अत्यधिक प्रसन्नता प्राप्त हुई थी और वे अपनी खुशियों का आनंद लेने के लिए दिवाली मनाते है |

काशी की देवी दीवाली

फोटो : vidhantravels.com

शास्त्रों के अनुसार इस दिन सायंकाल में भगवान विष्णु ने  मत्स्य अवतार धारण किया था | इसी दिन उनके वामन अवतार ने बलि को सबक सिखाकर पुनः बैकुंठ लोक आये थे | उन्ही के स्वागत में देवताओ ने दीप जलाकर देव दिवाली मनाई थी | भगवान शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर और उसकी असुरी सेना का संहार किया था और देवताओ ने इस दिन भी दीप जलाकर खुशियाँ मनाई थी | इसी कारण इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है |

काशी में गंगा के  घाटो पर बढ़ी धूम धाम से मनाई जाती है देव दिवाली :

काशी शहर में देव दिवाली एक प्रमुख त्यौहार है | देश विदेश से भक्त इस महा गंगा आरती का भाग बनने आते है |  इन पावन घाटो पर हजारो दीपक प्रज्जवलित किये जाते है | महा गंगा आरती और आतिशबाजी की जाती है | काशी के ये घाट किसी देव लोक से कम नही लगते और इतना सुन्दर आध्यात्मिक नजारा होता है की मन आस्था में भाव विभोर जो जाता है | अलौकिक दृश्य होता है जब गंगा नदी में प्रज्ज्वलित दीपक छोड़े जाते है |

घर में भी मनाये देव दिवाली :

जिस घर में इस दिन संध्या के समय दीपक प्रज्जवलित किया जाता है उस घर में कभी कोई अभाव नही रहता |

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