छठ पूजा का अत्यधिक महत्व और कथा

छठ पूजा की महिमा

छठ पूजा का महत्व और कथा

कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि को सुख-समृद्धि, गुणवान पुत्र प्राप्ति, आरोग्यता, वा पुत्र को दीर्घायु रखने के लिए षष्टी का पर्व  छठ पूजा (Chhath Puja )  मनाया जाता है। इसमें छठ देवी और भगवान सूर्य की आराधना करते हुए उपवास किया जाता है। इस पर्व का महत्व और महिमा शास्त्रों में बताई गयी है |

इस पर्व को लेकर कई पौराणिक , ऐतिहासिक  कथाएं प्रचलित हैं। हालांकि, माना जाता है कि रामायण महाभारत काल से छठ मैय्या  की पूजा की जा रही है |

छठ पूजा

फोटो : sahisamay.com

कौन है छठ माँ :



इन्हे भगवान सूर्य की बहिन बताया गया है अत: इनके साथ सूर्य भगवान की भी पूजा की जाती है |

छठ पूजा से द्रोपदी ने पुनः दिलवाया पांडवो को खोया हुआ राजपाट :

एक कथा के अनुसार जब पांडव जुआ में कौरवो से अपना सारा राज हार गए,  तब द्रौपदी ने छठ देवी का व्रत रखा था । इस व्रत से द्रोपदी की मनोकामनाएं पूरी हुईं और पांडवों ने फिर से अपना राजपाट वापस ले लिया था।

किन किन जगह धूम धाम से मनाया जाता है छठ का त्यौहार :

यह भारत के बिहार , उत्तर प्रदेश , झारखण्ड और भारत के बाहर नेपाल में मुख्य रूप से मनाया जाता है |

वीर पुत्र की प्राप्ति के लिए होती है छठ पूजा :

एक अन्य कथा के अनुसार महाभारत काल में कुन्ती को दुर्वासा ऋषि ने वरदान दिया था उस वरदान की सत्यता को जानने के लिए जब कुंती कुंवारी थी तब भगवान सूर्य का आह्वान करके पराक्रमी पुत्र की इच्छा जताई। तब भगवान सूर्य ने कुंवारी कुंती को कर्ण जैसा पराक्रमी और दानवीर पुत्र दिया। मान्यताओं के अनुसार तभी से कर्ण की तरह ही पराक्रमी पुत्र के लिए छठ देवी और सूर्य की आराधना की जाती है ।

श्री राम ने भी शुरू कराई थी सूर्य की पूजा षष्ठी तिथि पर :

इस सन्दर्भ में एक कथा यह भी है कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम लंका पर आक्रमण


कर रावण का वध कर अयोध्या आपस आये तो उन्होंने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्यदेव की उपासना करके उनसे आशीर्वाद मांगा । अपने राजा भगवान श्रीराम ऐसी भक्ति भावना को देखकर उनकी प्रजा ने भी षष्ठी का व्रत रखना प्रारम्भ कर दिया। मान्यता है कि तभी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता हैं।

कर्ण से भी जुडी है इसका पूजन :

यह तो हम सभी जानते है की कुंती की पहली संतान सूर्य पुत्र थी जिसका नाम कर्ण था | कर्ण सूर्य के महान भक्त थे और हर  दिन कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देते थे | उन्ही के कारण  भी यह अर्घ्य देने की भी परंपरा चली आ रही है |

2017 मे कब आएगी छठ पूजा :

Chhat Puja 2017 Calender

2017 में यह 24th अक्टूबर  से 27th अक्टूबर तक चार दिवसीय छठ पूजा का त्यौहार मनाया जायेगा
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