अन्नकूट पर्व और गोवर्धन पूजन की महिमा

अन्नकूट पर्व का महत्व और गोवर्धन पूजा :

भारत के सबसे बड़े त्यौहार दिवाली के अगले दिन अन्नकूट पर्व मनाया जाता है | इस दिन भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है | मंदिरों में तरह तरह के भोग  बनाकर देवी देवताओ के प्रसाद चढ़ाकर भक्तो में वितरित किया जाता है | कही कही भगवान को 56 भोग चढाने का महत्व अत्यंत रहता है | उसके बाद यह प्रसाद संध्या पर भक्तो में वितरित कर दिया जाता है |


अन्नकूट पूजा गोवर्धन

8 बार दिन में खाने वाले बाल कृष्ण ने इंद्र के कोप से उत्पन्न भीषण वर्षा से सम्पूर्ण ब्रज को गोवर्धन पर्वत को उठाकर बचाया था | यह क्रम लगातार 7 दिन तक चला और फिर दीपावली के अगले दिन खत्म हुआ | अत: 8*7 =56 तरह के व्यंजन से भगवान कृष्ण को खाना खिलाया गया को बाद में 56 भोग के रूप में प्रसिद्ध हुआ | कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत के सभी ब्रजवासी आभारी रहे और फिर शुरू हुआ इस दिन से इस पर्वत की पूजा की प्रथा |

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अन्नकूट प्रसाद कृष्ण मंदिर

घर में कैसे की जाती है गोवर्धन पूजा :

गोवर्धन पूजा यह पर्व प्रकृति के साथ व्यक्ति के सम्बन्ध और आभार को प्रकट करता है | यहा ब्रज के गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परम्परा है  | घर की स्त्रियाँ सुबह जल्दी नहा कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लेती है | फिर घर के बाहर मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है | इस पर रुई करवे से पूजा करके बतासे और चावल के खील का भोग लगते है और ऊपर एक दीपक प्रज्जवलित करते है | गाँव में पशुओ को नहला कर उनकी भी इस दिन पूजा की जाती है |

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