सूतक और पातक लगना किसे कहते है ? ये कब लगते है

हिन्दू धर्म में हमारे ऋषि मुनियों ने जीवन में आने वाले कई पड़ाव के लिए कई धार्मिक नियम बनाये है जिससे ग्रह नक्षत्रो की गतिविधि का भी ध्यान रखा गया है | यदि इन सभी धार्मिक नियमो को हम वैज्ञानिक नजरिये से भी देखे तो यह स्वास्थ्य के हिसाब से बिल्कुल सटीक बैठते है | इन नियमो से जीवन सरल, स्वस्थ आगे बढ़ता है |

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से दो शास्त्रोक्त विधान सूतक और पातक की बात करने वाले है | ये जन्म , मृत्यु और ग्रहण के समय लगते है | सार में समझे तो यह एक समय अवधि है जब धार्मिक पूजा पाठ , मंदिर जाना बंद होता है |

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जन्म के समय लगने वाला सूतक :- जब परिवार में  नवजात बच्चे का जन्म होता है तो घर के सदस्यों पर सूतक लग जाता है | इसे राजस्थान में ‘सावड’ कहते है | यह अमूमन दस दिनों का होता है | इन दस दिनों में घर के सदस्यों का मन्दिर जाना और धार्मिक कर्म करना निषेध होता  है | बच्चे को जन्म देने वाली माँ इन 10 दिनों तक रसोई में प्रवेश नही करती | उसके बाद नावन के बाद शुद्धिकरण करके ही सभी घर के सदस्य शुद्ध होते है |

मृत्यु के बाद लगने वाला पातक :- मरण के’ निमित्त से हुई अशुद्धि को पातक कहा जाता है | किसी परिवार में जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो परिवार पर लगभग 13 दिनों का पातक लग जाता है | लोग आज कल इसे भी सूतक ही कहते है पर गरुड़ पुराण में इसे पातक बोला जाता है |

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पातक की अवधि खत्म होने पर शुद्धिकरण के लिए हवन यज्ञ करवाया जाता है और ब्राहमणों को भोजन करवाया जाता है | इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है |

ग्रहण के समय लगने वाला सूतक :- जब ग्रहण लगता है चाहे वो सूर्य ग्रहण हो या चन्द्र ग्रहण | ग्रहण लगने से कई घंटे पहले सूतक काल लग जाता है | पंडितो के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण के 12 घंटे पहले तो चन्द्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लगता है |

वैज्ञानिक तर्क भी सही बताते है सूतक और पातक को

हमारे पूर्वजो ने जो नियम सूतक और पातक को लेकर हमारे लिए बनाये है , यदि हम उन्हें गहराई से सोचे तो यह विज्ञानं के अनुसार बिलकुल सही साबित होते है | जन्म के समय बच्चे और जच्चे के स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्हें बाहरी वातावरण से दूर रखा जाता है | नवजात बच्चा बाहरी वातावरण का आदि नही होता साथ ही उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है अत: सूतक के नाम से उन्हें दुसरो से  दूर रखा जाता है | फिर दस दिन बाद हवन शुद्धिकरण द्वारा सूतक ख़त्म किया जाता है |

इसी तरह जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तब यदि व्यक्ति किसी संक्रमण या बीमारी के कारण मरा है तो पातक के नाम से उस जगह को अशुद्ध मान लिया जाता है | फिर 13 दिन की अवधि पूरी होने के बाद शुद्धिकरण और हवन के बाद पातक हट जाता है |

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