सूरदास की जीवनी , कहानी और कृष्ण प्रेम

Know about Surdas Biography In Hindi and his story

सूरदास महान कवि , संगीतकार और कृष्ण के परम प्रेमी थे | वे अपनी महान रचनाओ में श्री कृष्ण लीला और व्यक्तित्व का अनुपम दर्शन करवाते थे | उनके छंद सीधे दिल में उतरकर कृष्ण लीला को अंखियो के सामने ले आते थे | सूरदास के जीवन को लेकर कई भ्रांतियां हैं। फिर भी लोक धारणा के आधार पर हम भी उनकी जीवनी आपके सामने लाने का प्रयास कर रहे है |

कौन थे कृष्ण प्रेमी सूरदास

कैसे पड़ा नाम सूरदास

सूरदास को लेकर कई मत ऐसे है जिसमे उन्हें जन्म से ही अँधा बताया गया है जबकि कई मत उनकी लेखनी के आधार पर उन्हें जन्म से अँधा नही बताते |

सूरदास जयंती

बल्लभ सम्प्रदाय के अनुसार सूरदास के गुरु बल्लावाचार्य थे जो सूरदास से 10 दिन बड़े थे | अत: एस विधि से सूरदास का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी 1535 के निकट बताया जाता है | हालाकि इसमे भी कई विद्वान मतभेद रखते है |

छ वर्ष की उम्र में छोड़ा घर और बन गये कृष्ण प्रेमी

कृष्ण के प्रति समर्पण और अपनी काव्य शैली के कारण सूरदास ने अपना घर छ: वर्ष की बाल्य अवस्था में ही छोड़ दिया | वे ब्रज भूमि पर रहने लगे और अपने आप को कृष्ण की रचानो के लिए समर्पित कर दिया | ऐसा माना जाता है कि वे 100 साल जीवित रहकर स्वर्ग को प्राप्त हुए थे |

सूरदास की मुख्य रचनाये

इन्होने पांच मुख्य ग्रन्थ लिखे जो है

सूरसागर , सूरसारावली , साहित्य-लहरी , नल-दमयन्ती और  ब्याहलो

अकबर के दरबार के संगीतज्ञ

सूरदास ब्रज भाषा के महान कवि और संगीतज्ञ थे कि उनकी महान कीर्ति के कारण उन्हें अकबर के दरबार का मुख्य संगीतज्ञ नियुक्त किया गया |

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