सरयू नदी का महत्व महिमा और जुडी कथा और अन्य जानकारियाँ

अयोध्या का जिक्र जब भी किया जाता है , उस धार्मिक शहर के साथ श्री राम और सरयू नदी का महत्व याद रखा जाता है | वैदिक कालीन यह पवित्र नदी अयोध्या के सम्पूर्ण इतिहास को देखते आई है | यही वो नदी है जिसमे विष्णु अवतारी श्री राम और लक्ष्मण ने जल समाधी ली थी | यह नदी इतनी महिमापूर्ण है क्योकि यह श्री नारायण भगवान के हर्षित मन से निकले आँखों के आंसू से बनी है | हमारे पुराणों में इस नदी का बार बार उल्लेख मिलता है |

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सरयू नदी का महत्व कहानी

सरयू नदी से जुडी कथा शास्त्रों से

पुराणों में बताया गया है की एक बार शंकासुर दैत्य ने वेदों को चुरा कर धर्म का अंत करना चाहा | तब वेदों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर उस असुर से वेदों को बचाया | जब भगवान विष्णु अपने वास्तविक रूप में आकार ब्रह्मा जी को फिर से ये वेद दे रहे थे तब हर्षित होकर उनके नेत्रों से कुछ जल की बुँदे निकली जिसे ब्रह्मा जी ने मानसरोवर में डाल दिया | इस जल को बाद में वैवस्वत महाराज जी अपने बाण से बाहर निकाला जो एक नदी का रूप ले ली और बाद में सरयू नदी कहलाई |

सरयू नदी का अन्य नाम और बहाव क्षेत्र

सरयू नदी को काली , घाघरा , शारदा ,करनाली , देविका , रामप्रिया ,सरजू आदि नामो से जाना जाता है | वैसे तो इसका प्राचीन काल में उद्गम स्थल हिमालय था पर अब भौगोलिक उतार चढाव के कारण वहा से लुप्त हो गयी है | अब यह नदी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के खैरीगढ़ रियासत की राजधानी रही ‘‘सिंगाही’’ के जंगल वन की एक विशाल झील से निकलकर मैदानी भागों में बहती  हैं | यह बलिया और छपरा के बीच गंगा नदी में मिल जाती हैं। मान्यता है कि इस नदी को भागीरथ ने गंगा से मिलवाया था | नेपाल में इस नदी को काली नदी के नाम से जाना जाता है |

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कौनसे शहर है सरयू नदी के तट पर ?

भारत में फैजाबाद, अयोध्या, बहराइच, सीतापुर, गोंडा, टाण्डा, राजेसुल्तानपुर, दोहरीघाट तथा बलिया आदि शहर सरयू तट पर ही स्थित हैं।

अयोध्या यात्रा बिना सरयू स्नान के अधूरी

सरयू आरती

इस पौराणिक नदी का महत्व इतना है जितना काशी में  गंगा का मथुरा में यमुना का | इस नदी में पवित्र स्नान किये बिना अयोध्या की पवित्र यात्रा पूर्ण नही होती | अब अयोध्या विवाद समाप्त होने बाद इस नदी की हर संध्या भव्य आरती होने लगी है जिसमे हजारो श्रद्दालु भाग लेने आते है |

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