राधा कुण्ड , जहां स्नान से मिलती है संतान की प्राप्ति

राधा कुण्ड गोवर्धन , जहा मिलता है संतान सुख

ब्रज का कण कण कृष्णमय है और यहा आने वाले भक्तो पर राधे और कृष्ण अपनी कृपा बरसाते है | गिरिराज जी के रूप में गोवर्धन की परिक्रमा का महत्व अत्यंत है जिन्हें कृष्ण ने पूजे जाने की बात कही | फिर आते है कृष्ण जन्म भूमि मथुरा में देखने लायक दर्शनीय स्थल | 


संतान सुख देने वाला राधा कुण्ड गोवर्धन की धरा पर एक जगह ऐसी भी है जो नि:संतान माता पिता को संतान देने का आशीष देती है | यह चमत्कारी जगह है गोवर्धन  की परिक्रमा मार्ग में राधा कुंड। मान्यता है कि इस कुंड में अगर नि:संतान दंपति, एक साथ स्नान करें तो उनके घर बच्चे की किलकारी गूंज सकती है।

संतान के लिए राधा कुंड में क्यों होता है स्नान ?

कहा जाता है कि एक बार गोवर्धन पर्वत  में गाय चराने के दौरान अरिष्टासुर राक्षक ने गाय के बछड़े का रूप धारण कर नन्दलाल कान्हा पर आक्रमण कर दिया | कृष्ण समझ गये की यह कोई बेरूपिया दैत्य है | तब भगवान ने उस बछ़ड़े का वध किया। पर राधा जी इसी बात से नाराज हो गईं और उन्हें  गोवंश हत्या के पाप का भागी मानने लगी ।


सारे तीर्थो का जल लाया गया

उन्होंने कान्हा से सभी तीर्थो का पवित्र जल लाकर एक कुण्ड बनाने की बात कही जिससे की कृष्ण पाप से मुक्त हो | राधे ने अपने कंगन से इस स्थान पर कुंड खोदा | जिसका नामकरण राधा कुंड हुआ | समीप ही कृष्ण ने भी अपनी बांसुरी से एक टेड़े कुंड की स्थापना की जिसे श्याम कुण्ड बोला गया |

कैसे स्नान करे

राधा कृष्ण ने इसी कुंड में स्नान के बाद किया था अष्ट सखियो संग महारास। महारास से प्रसन्न होकर राधा जी ने श्रीकृष्ण को यह आशीर्वाद दिया कि जो भी अहोई अष्टमी की रात राधा और कृष्ण कुंड में स्नान करेगा उसके घर साल भर के अंदर ही संतान की किलकारी गूंजेगी। राधा कुण्ड को लेकर मान्यता है की जो स्त्री घुटने से ज्यादा जल में खड़े होकर, अपने बालो को खोल कर राधे का स्मरण करके स्नान करेगी उन्हें जल्दी ही संतान की प्राप्ति होगी |साथ में राधा कृपा कटाक्ष का 100 बार पाठ भी करना चाहिए |

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