पीपल में है शनि देव का वास

पीपल में शनि देव का वास है – इससे जुडी कथा

हमारे सनातन धर्म में सभी पेड़ पौधो में पीपल की पूजा का अत्यंत महत्व है | धर्म शास्त्रों में बताया गया है की इस पेड़ में त्रिदेव के साथ लक्ष्मी जी शनि और बालाजी महाराज का भी वास है | सभी 33 कोटि देवी देवता इसमे निवास करते है | शनिवार के दिन भगवान शनिदेव संध्या के समय इस वृक्ष में निवास करते है अत: शनिवार के दिन संध्या के समय एक तेल का दीपक जरुर प्रज्जवलित करना चाहिए | आइये जाने कैसे शनि भगवान का वास पीपल में हुआ , इससे जुडी पौराणिक कथा …क्यों शनि का वास पीपल में

पौराणिक कथाये और कहानियाँ :- हिन्दू सनातन धर्म से जुडी कथाये

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एक समय कि बात है असुरो ने तीन लोक और चौदय भुवन में अपना आतंक पनपा रखा था | एक असुर कैटभ ने तो एक ऋषि आश्रम में पीपल का रूप धारण कर रखा था | जब भी कोई ऋषि किसी कारण वश उस पेड़ के निचे आता तो वो असुर उसे निगल जाता | इस तरह उस आश्रम से ऋषि गण कम होने लगे | वे कैसे लापता हो रहे थे , यह सभी के लिए पहेली बना हुआ था |  सभी ऋषि मुनि सूर्यदेवता के पुत्र शनिदेव के पास गए और उनसे सहायता कि गुहार लगाईं, तब शनिदेव उनकी प्रार्थना सुनकर एक ऋषिमुनि के वेश धारण किया और उस आश्रम में रहने लगे |

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एक दिन वे उसी पेड़ के निचे आये और उन्हें ऋषि मानकर कैटभ ने उन्हें वृक्ष रूप में ही पकड़ लिया | शनिदेव अब सारा माजरा समझ गये | उन्होंने कैटभ के साथ युद्ध किया और उसका संहार कर दिया | सभी ऋषि मुनियों को उन्होंने बताया की आप पूजा अर्चना करे और वे स्वयं इस पीपल के पेड़ के निचे वास करके उनकी रक्षा करेंगे |

तभी से शनि देव का वास पीपल के वृक्ष में बताया जाता है | जो व्यक्ति शनिवार के दिन इस पेड़ की पूजा करता है उसे शनि की साढ़े साती या ढैय्या  के दोषों से राहत मिलती है |

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