पेड़ पर शायरी – दोहे ,

काट दिए पेड़ सब ,

कही नही है छाँव

कहते सीना ठोक कर

बदल रहा है गाँव |

तुमने एक बार भी नही सोचा

कितनी मेहनत लगती है पेड़ो को बढ़ाने के लिए

सीधे काट दिए इन मासूम बच्चो को

बस अपने मकानों को सुन्दर बनाने के लिए |

लगाये पेड़ अधिक से अधिक

हरियाली को दे बढ़ावा |

बिन पेड़ो के धरती जल पड़ेगी

धरा से चारो ओर निकलेगा लावा |

मानव ने अपनी खुशियों को मार दिया |
जब उसने कुल्हाड़ी से पेड़ काट दिया |


मानव को फल और छाया देते हैं वृक्ष,
हवा को शुद्ध करते, ऑक्सीजन देते हैं वृक्ष,
पशु-पक्षी, कीट-पतंगे सबको घर देते हैं वृक्ष,
सभी जीवों को कितना कुछ देते हैं वृक्ष.


पेड़ आज भी स्वार्थी  नहीं है,
उन्हें फल, फूल, छाया
देने से इनकार नहीं हैं.

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