परमा एकादशी व्रत कथा , महत्व , पूजा विधि 2018

परमा एकादशी व्रत कथा और महत्व

2018 Parama Ekadashi Vrat Katha , Mahatv , Pooja Vidhi

वैसे तो पुरे साल में 24 एकादशियाँ आती है पर यदि किसी वर्ष अधिक मास आये तो यह 26 एकादशियाँ बन जाती है | जो दो एकादशी  इसमे अतिरिक्त शामिल होती है वे है परमा (पुरुषोत्तमी ) और पद्मिनी एकादशी |

इस साल 2018 में परमा एकादशी व्रत 10th June (Sunday) को आ रही है |


परमा एकादशी अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है जबकि पद्मिनी शुक्ल पक्ष की ग्यारस को बताया जाता है |

अधिकमास की परमा एकादशी व्रत

परमा एकादशी की व्रत कथा

काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ निवास करता था। वे दोनी ही परम धार्मिक और अतिथियों की सेवा हृदय  से करने वाले युगल थे | वे स्वयं भूखे रहकर जितना उनसे हो सकता , अपने घर आये हुए अतिथियों की सेवा के लिए किया करते थे | हालाकि उनकी आर्थिक हालत ठीक नही थी | धन अभाव के कारण ब्राह्मण ने परदेश जाकर काम करने की बात अपनी पत्नी से कही | पर उसकी पत्नी ने उसे समझाया की यह गरीबी हमारे भाग्य और पूर्व जन्म के कारण है | यदि हमारे भाग्य में धन होगा तो वो हमें यहा काम करने से भी प्राप्त हो सकता है |

ब्राह्मणी की बात सुनकर ब्राह्मण देवता संतुष्ट हो गये और वही रुक गये |


एक दिन उसकी कुटिया में एक विद्वान संत कौण्डिल्य पधारे | दोनों पति पत्नि उन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए और उनकी बहुत आवभगत की | उन्होंने ऋषि से गरीबी दूर करने का उपाय पूछा | ऋषि ने उन्हें बताया की अधिक मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत नियम से करने पर धन लक्ष्मी की कृपा उनके परिवार पर बन जाएगी | किसी समय में धनाधिपति कुबेर ने इस व्रत का पालन किया था जिससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें देवताओ के धन का कोषाध्यक्ष का पद प्रदान किया।

ऋषि के बताये मार्ग पर दोनों ब्राह्मणी और ब्राह्मण ने भगवान विष्णु की नियम से पूजा अर्चना की और व्रत रखा | समय आने पर उनकी गरीबी दूर हो गयी और उन्होंने  पृथ्वी पर काफी समय तक सुख भोगकर अंत में विष्णु लोक को प्राप्त किया |

व्रत और पूजा विधि

यह व्रत सभी एकादशियो में सबसे कठिन है | व्रती की पांच दिन तक यह व्रत करना होता है और हर दिन भगवान विष्णु की पूजा में स्वयं को लगाये रखना होता है | विधिपूर्वक पंचरात्रि व्रत रखे और पाँच दिन तक निर्जल रहे | उसके बाद किसी अच्छे ब्राह्मण को भोजन कराये और अपनी क्षमता अनुसार दान देकर ही व्रत खोले |

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