माँ पर शायरी और दोहे कविता

Maa Ke Liye Shayari , Message In Hindi

रूह के रिश्तों की ये गहराइयाँ तो देखिये,
चोट लगती है हमें और चिल्लाती है माँ,
हम खुशियों में माँ को भले ही भूल जायें,
जब मुसीबत आ जाए तो याद आती है माँ।

माँ के लिए शायरी और दोहे
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हालातों के आगे जब साथ
न जुबाँ होती है,
पहचान लेती है ख़ामोशी में हर दर्द
वो सिर्फ “माँ” होती है।
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अपनी माँ को कभी न देखूँ तो चैन नहीं आता है,
दिल न जाने क्यूँ माँ का नाम लेते ही बहल जाता है।
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मांगने पर जहाँ पूरी हर मन्नत होती है,
माँ के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है।
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तेरे ही आँचल में निकला बचपन,
तुझ से ही तो जुड़ी हर धड़कन,
कहने को तो माँ सब कहते
पर मेरे लिए तो है तू भगवन।


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ऐ अँधेरे देख मुह तेरा काला हो गया,
माँ ने आँखें खोल दी, घर में उजाला हो गया।
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जब भी बैठता हूँ तन्हाई में मैं तो उसकी यादें रुला देती हैं,
आज भी जब आँखों में नींद न आये तो उसकी लोरियां
मुझे झट से सुला देती हैं।
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जब भी मेरे होठों पर झूठी मुस्कान होती है,
माँ को न जाने कैसे छिपे हुए दर्द की पहचान होती है,
सर पर हाथ फेर कर दूर कर देती है परेशानियाँ
माँ की भावनाओं में बहुत जान होती है।

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गम हो, दुःख हो या खुशियाँ
माँ जीवन के हर किस्से में साथ देती है,
खुद सो जाती है भूखी
पर और बच्चों में रोटी अपने हिस्से की बाँट देती है।

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कैसे भुला दूँ मैं अपने पहले प्यार को
कैसे तोड़ दूँ उसके ऐतबार को,
सारा जीवन उसके चरणों में अर्पण कर दूँ
छोड़ दूँ उसकी खातिर मैं इस संसार को।

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उसकी दुवाओं में ऐसा असर है कि सोये भाग्य जगा देती है,
मिट जाते हैं दुःख दर्द सभी, माँ जीवन में चार चाँद लगा देती है।

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माँ ने तो उम्र भर संभाला ही था
हमें तो जिंदगी ने रुलाया है,
कहाँ से पड़ती काँटों की आदत हमें
माँ ने हमेशा अपनी गोद में सुलाया है।
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जब-जब कागज पर लिखा मैने माँ का नाम,
कलम अदब से बोल उठी हो गये चारो धाम।

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जब भी गंदा होता हूँ मैं वो साफ़ कर देती है,
अपनी हर संतान के साथ इन्साफ कर देती है,
नाराज होना तो फितरत होती है औलादों
माँ से जब भी माफ़ी मांगो हर खता माफ़ कर देती है।

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जन्नत है माँ के पैरों में क्यों छोड़ कहीं और जाऊं मैं
मेरे सिर पर साया बना रहे हर पल बस यही मनाऊं मैं।

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वो जमीं मेरा वो ही आसमान है
वो खुदा मेरा वो ही भगवान् है,
क्यों मैं जाऊं उसे कहीं छोड़ के
माँ के क़दमों में सारा जहान है।

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