दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य से जुडी मुख्य 10 बाते

हमारे धार्मिक ग्रंथो के अनुसार प्राचीनकाल से ही मनुष्य जीव जन्तुओ दानवो देवताओ का अस्तित्व था | देवताओ के गुरु बृहस्पति तो दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे |

कौन थे गुरु शुक्राचार्य

गुरु शुक्राचार्य

  1. शुक्राचार्य ने दीक्षा देकर कई दैत्यों को तीनो लोको का राजा बनाया था |
  2. शुक्राचार्य ने भगवान शंकर की तपस्या से मृत संजीवनी विद्या की प्राप्ति की और कई बार दैत्यों को जीवित किया |
  3. शुक्र नीति शास्त्र के प्रवर्तक भी रहे जो की ज्ञान और नीति का भंडार है |
  4. इन्हे वीर्य के अधिष्ठाता के रूप में भी जाना जाता है |
  5. महर्षि भृगु और हिरण्यकशिपु की पुत्री दिव्या के पुत्र थे शुक्राचार्य |
  6. इन्हे योग , मंत्रो , रसो और औषधियों का विशेष ज्ञान था |
  7. एक बात इन्होने घोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और इन्हे धन का स्वामी भी बना दिया गया | वे धन इन्होने दैत्यों के उत्थान में लगा दिया |
  8. इनके परम आराध्य भगवान शिव थे | इन्होने कई घोर तपस्या करके दुर्लभ वरदान पाए है |
  9. इनके तीन संतान थे , देवयानी नाम की पुत्री और दो पुत्र जिनके नाम शंद और अमर्क थे |
  10. वामन अवतार के रूप में जब विष्णु बलि से तीन पग जमीन मांगने आये तो यह बलि के कमण्डल में बैठ गये , कमंडल से पानी निकालते समय राजा बलि से गलती से इनकी एक आँख फुट गयी और फिर ये  एकाक्ष (एक आँख वाला ) कहलाये |

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