गुरु गोरखनाथ की कथा – अमर कहानी

गुरु गोरखनाथ महिमा और कथा

Guru Gorakhnath Story – History | Amar Kahani In Hindi

गुरु गोरखनाथ को महान सिद्ध पुरषों में से गिना जाता है | भारत में नाथ योगियों की परंपरा बहुत ही प्राचीनकाल से रही है | इसी नाथ सम्प्रदाय में महायोगी हठयोगी गुरु गोरखनाथ का जन्म हुआ | नाथ को हिन्दू सनातन धर्म का एक अभिन्न अंग माना गया है |  भगवान शिव को आदिनाथ और दत्तात्रेय को आदिगुरु का पद प्राप्त है | इन्हीं से आगे चलकर नौ नाथ और नौ नाथ से 84 नाथ सिद्धों की परंपरा चालू हुई है । आपने अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि कई तीर्थस्थलों के नाम सुने होंगे। आपने भोलेनाथ, भैरवनाथ, गोरखनाथ आदि नाम भी सुने ही होंगे।

पढ़े : गुरु गोरखनाथ के शाबर मंत्र की शक्ति

गुरु गोरखनाथ कथा


गोरखनाथ जी  का जन्म 11वीं शताब्दी के करीब हुआ था | इनके गुरु मत्स्येन्द्रनाथ (मछंदरनाथ ) थे | इन्हे  नाथ हिंदू मठ आंदोलन , सम्मोहन और शाबर मंत्रो के लिए याद किया जाता है | इनके जीवन को लेकर लोगो में मतभेद है | कई इन्हे भगवान शिव का अवतार मानते है , तो कई इन्हे सामान्य योगी पुरुष |

गुरु गोरखनाथ का प्रसिद्ध मंदिर गोरखपुर उत्तर प्रदेश में है | यह मंदिर मठ आध्यात्मिक सुख पाने वाले और संसार से विरक्त रहने वालो के उपयुक्त जगह है |

गुरु गोरखनाथ के जन्म की कथा

एक बार मत्स्येन्द्रनाथ जी भिक्षा मांगने एक गाँव में गये | उस गाँव में एक रोटी बिलखती एक स्त्री उनमे पैरो पर गिर गयी | गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जी ने उसके दुःख का कारण पूछा | महिमा ने बताया की उसे संतान सुख की प्राप्ति नही हो रही है | मुझे माँ बनने का आशीर्वाद दे | गुरु मत्स्येन्द्रनाथ ने अपनी झोली से मन्त्र जाप के साथ एक चमत्कारी भस्म उस महिला को दी | उन्होंने बताया की इससे तुम्हे पुत्र की प्राप्ति हो जाएगी और वे चले गये | महिला ने यह बात अपनी सहेलियों को बताई , सबने इस लीला को पाखंड बताया | महिला भी उनकी बातो में आकर खेत में गोबर की ढेरी पर भस्म को फेक आई |


12 साल बाद फिर से मत्स्येन्द्रनाथ जी उसी गाँव से होकर गुजर रहे थे | उन्हें वही महिला मिल गयी | उन्होंने पूछा की माई अब तेरा बच्चा तो 12 साल का हो गया होगा | कैसा है वो ?

महिला उनकी बाते सुनकर रोने लगी और भस्म को गोबर में गिराने की बात बता दी | मत्स्येन्द्रनाथ जी ने कहा की वो दिव्य भस्म है और व्यर्थ नही हो सकती | तुम मुझे उस स्थान पर ले चलो |
पढ़े : गुरु दत्तात्रेय के सिद्ध मंत्र
महिला के साथ गुरु उस स्थान पर गये और उन्होंने उस बालक को पुकारा | बालक गोबर की ढेरी से बाहर निकला और अपने गुरु के चरणों में प्रणाम किया | गुरु ने उन्हें गोरखनाथ का नाम दिया और अपने साथ तपस्या के लिए ले गये | इस तरह चमत्कारी रूप से गोरखनाथ के जन्म की कथा है |

गुरु की इच्छा पूर्ति के लिए दिया अपनी आँख का दान

एक बार गोरखनाथ जी गुरु के आदेश पर भिक्षा मांगने गये | भिक्षा देने वाले ने  उनसे गुस्से में  पूछा की की तुम भिक्षा के बदले क्या दे सकते हो | गुरु गोरखनाथ ने कहा , “आप जो चाहे वो मैं दे दूंगा ” |  भिक्षा देने वाले ने उनसे उनकी एक आँख मांग ली | गुरु गोरखनाथ ने झट से अपनी एक आँख निकाल कर उसके हाथ में दी दी | जय हो गुरु गोरखनाथ की | इस घटना का जन उनके गुरु मत्स्येन्द्रनाथ को पता चला तो उन्होंने इस बालक को उनसे भी बड़ी गुरु बनने का आशीर्वाद दे दिया |

गोरखनाथ शाबर मंत्र :


यह अत्यंत शक्तिशाली और शीघ कार्य करने वाले मंत्र है | इनसे वशीकरण या कोई कार्य सिद्धि करवाई जा सकती है |

Join Best Facebook Page of Hinduism Follow us on Twitter and Google Plus

Other Relative Posts

शिष्य के लिए गुरु की महिमा

वेदव्यास जी का जीवन परिचय और रोचक बाते

देवताओ के देवगुरु बृहस्पति की महिमा

गुरु दत्ता की तपोभूमी माउंट आबू

गोस्वामी तुलसीदास जी कहानी और जीवन परिचय से जुड़ी बाते

 

One comment

  • मैं गुरु गोरखनाथ के दीक्षा लेना चाहता हूं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.